अन्नपूर्णा माता आरती | Annapurna Aarti
॥ आरती — अन्नपूर्णा माता ॥ जय अन्नपूर्णा माता, जग के दाता सुखदाई। भोजन का जो रूप धरे, करुणा की मूरत आई॥ जय अन्नपूर्णा माता ॥ कमलासन ...
पढ़ें →आरती हिंदू धर्म की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र परंपरा है जो सदियों से भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग रही है। यह एक भक्तिमय अनुष्ठान है जिसमें दीपक या कपूर की लौ से देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की जाती है। आरती के समय मंगलमय वातावरण में घंटियों की मधुर ध्वनि, शंख की गूंज और भक्तिगीतों का सामूहिक गायन होता है जो मन को शांति और आत्मा को तृप्ति प्रदान करता है। प्रत्येक देवी-देवता की अपनी विशिष्ट आरती होती है जिसमें उनके गुणों, लीलाओं और महिमा का वर्णन होता है। सुबह और शाम की आरती का विशेष महत्व माना जाता है। आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, नकारात्मकता दूर होती है और भगवान की कृपा प्राप्त होती है। यहां आपको विभिन्न देवी-देवताओं की संपूर्ण आरती संग्रह मिलेगा जिसमें लिखित पाठ के साथ-साथ उनका अर्थ और पूजा विधि भी दी गई है। चाहे आप गणेश जी की आरती हो, लक्ष्मी जी की, हनुमान जी की या किसी भी अन्य देवता की आरती खोज रहे हों, यहां आपको पूर्ण जानकारी मिलेगी।
॥ आरती — अन्नपूर्णा माता ॥ जय अन्नपूर्णा माता, जग के दाता सुखदाई। भोजन का जो रूप धरे, करुणा की मूरत आई॥ जय अन्नपूर्णा माता ॥ कमलासन ...
पढ़ें →॥ आरती — त्रिपुरा सुन्दरी माता ॥ जय त्रिपुरा सुन्दरी, जय जय ललिता माता। जय करुणा की मूरत, जग भक्तन की घटा॥ जय त्रिपुरा सुन्दरी, जय जय...
पढ़ें →॥ आरती — श्री कामाक्षी अम्मन ॥ जय कामाक्षी माता, जय जय कामाक्षी माता। ज्ञान‑कौशल्या, दीनदया, करुणा की मूरत माता। जय कामाक्षी माता, ...
पढ़ें →॥ आरती — कन्याकुमारी कुमारी अम्मन् ॥ जय कन्याकुमारी माता, जय जय कुमारी माता। सागर‑तीर की रहनुमाई, भक्तों की संकट हराता। जय कन्याक...
पढ़ें →॥ आरती — मीणाक्षी अम्मन ॥ जय मीणाक्षी अम्मन, जय जय मीणाक्षी अम्मन। सौन्दर्य सीता समान, करुणा अनन्त थम न। जय मीणाक्षी अम्मन, जय जय मी...
पढ़ें →॥ आरती — नैना देवी माता ॥ जय नैना देवी, जय जय नैना देवी। नयन दायक दया की, करुणा शिखा सवेली। जय नैना देवी, जय जय नैना देवी॥ गोबिंद सागर...
पढ़ें →॥ आरती — हिंग्लज माता ॥ जय हिंग्लज माता, जय जय हिंग्लज माता। जय तेजस्विनी माता, संकट हराने वाली माता। जय हिंग्लज माता, जय जय हिंग्लज ...
पढ़ें →॥ आरती — ज्वालामुखी माता (ज्वाला जी) ॥ जय ज्वाला माता, जय जय ज्वाला माता। अनल रूपा परब्रह्मा, तू दयालु दया सघाता। जय ज्वाला माता, जय ज...
पढ़ें →कलिघाट काली आरती (Kalighat Kali Aarti) ॥ आरती — कलिघाट काली माता ॥ जय काली माता, जय जय काली माता। जय करुणा की मूरत, जय भयहरिणी माता। जय काली मात...
पढ़ें →॥ करणी माता जी आरती ॥ ॐ जय अम्बे करणी, मैया जय अम्बे करणी। भक्त जनन भय संकट, पल‑छिन में हरणी ॥ ॐ जय अम्बे करणी… आदि शक्ति अविनासी, वेद...
पढ़ें →॥ आरती — कामाख्या देवी की ॥ आरती कामाख्या देवी की, जगत् उधारक सुर सेवी की ॥ आरती कामाख्या देवी की … गावत वेद पुराण कहानी, योनिरुप ...
पढ़ें →॥ आरती — श्री सालासर बालाजी की ॥ जयति जय जय बजरंग बाला, कृपा कर सालासर वाला ॥ चैत सुदी पूनम को जन्मे, अंजनि पवन खुशी मन में । प्रकट भए ...
पढ़ें →॥ श्री केदारनाथ आरती ॥ जय केदार उदार शंकर, मन भयंकर दुःख हरम। गौरी गणपति स्कन्द नन्दी, श्री केदार नमाम्यहम॥ शैल सुन्दर अति हिमालय, श...
पढ़ें →॥ श्री चित्रगुप्त आरती ॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे। स्वामी जय चित्रगुप्त हरे। भक्तजनों के इच्छित फल को पूर्ण करे॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे… ...
पढ़ें →॥ आरती — लक्ष्मण बालजती की ॥ आरती लक्ष्मण बालजती की। असुर संहारन प्राणपति की॥ जगमग ज्योति अवधपुर राजे। शेषाचल पै आप विराजे॥ आरती ...
पढ़ें →॥ भगवद् गीता आरती ॥ जय भगवद् गीते, जय भगवद् गीते। हरि‑हिय‑कमल‑विहारिणि, सुन्दर सुपुनीते ॥ जय भगवद् गीते। कर्म‑सुमर्म‑प्रकाशिन...
पढ़ें →॥ करवा चौथ आरती ॥ ओम जय करवा मैया, माता जय करवा मैया। जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नैया।। ओम जय करवा मैया। सब जग की हो माता, तुम हो रुद्...
पढ़ें →श्री सीता जी की आरती आरती श्री जनक दुलारी की, सीता जी रघुवर प्यारी की। आरती श्री जनक दुलारी की, सीता जी रघुवर प्यारी की। जगत जननी, जग क...
पढ़ें →