रविवार आरती (Sunday Aarti)
॥ आरती — श्री सूर्य जी की ॥ जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन। त्रिभुवन-तिमिर-निकन्दन, भक्त-हृदय-चन्दन॥ जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्द...
पढ़ें →हिंदू धर्म में सप्ताह के प्रत्येक दिन का अपना विशेष महत्व है और हर दिन किसी विशेष देवता को समर्पित है। रविवार सूर्य देव का दिन है, सोमवार भगवान शिव का, मंगलवार हनुमान जी और मंगल देव का, बुधवार गणेश जी और बुध देव का, गुरुवार विष्णु भगवान और बृहस्पति देव का, शुक्रवार माता लक्ष्मी और शुक्र देव का तथा शनिवार शनि देव का दिन माना जाता है। प्रत्येक दिन उस विशेष देवता की पूजा-आरती करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। रविवार को सूर्य देव की आरती से स्वास्थ्य और यश मिलता है, सोमवार को शिव जी की आरती से मन की शांति मिलती है, मंगलवार को हनुमान जी की आरती से शक्ति और साहस मिलता है, बुधवार को गणेश जी की आरती से बुद्धि का विकास होता है, गुरुवार को विष्णु जी की आरती से धन-समृद्धि मिलती है, शुक्रवार को लक्ष्मी जी की आरती से संपत्ति में वृद्धि होती है और शनिवार को शनि देव की आरती से कष्टों से मुक्ति मिलती है। यहां आपको सप्ताह के सभी सात दिनों की संपूर्ण आरती संग्रह मिलेगा। प्रत्येक दिन की आरती के साथ उस दिन के व्रत, पूजा विधि और विशेष मंत्र भी दिए गए हैं।
॥ आरती — श्री सूर्य जी की ॥ जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन। त्रिभुवन-तिमिर-निकन्दन, भक्त-हृदय-चन्दन॥ जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्द...
पढ़ें →॥ आरती — श्री शिवजी की ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ एकानन चतु...
पढ़ें →॥ आरती — श्री हनुमानजी की ॥ आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की। जाके बल से गिरिवर कांपे, रोग दोष जाके निकट न झांके। अंज...
पढ़ें →॥ आरती — श्री कृष्ण जी की ॥ आरती युगल किशोर की कीजै, तन‑मन‑धन न्यौछावर कीजै॥ गौरश्याम मुख निखरन लीजै, हरि का स्वरूप नयन भरे पीजै॥ र...
पढ़ें →॥ आरती — श्री बृहस्पति जी की ॥ ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा। छिन‑छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा॥ ऊँ जय बृहस्पति देवा॥ तुम पूर...
पढ़ें →॥ आरती — श्री संतोषी माता की ॥ जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता। अपने सेवक जन को, सुख सम्पत्ति दाता॥ जय संतोषी माता॥ सुन्दर चीर स...
पढ़ें →॥ आरती — श्री शनि देव की ॥ जय शनि देवा, जय शनि देवा, जय जय जय शनि देवा। अखिल सृष्टि में कोटि‑कोटि जन करें तुम्हारी सेवा। जय शनि देवा&hellip...
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