श्री रामदेव आरती (Shri Ramdev Aarti)
॥ श्री रामदेव आरती ॥ ॐ जय श्री रामादे स्वामी, जय श्री रामादे। पिता तुम्हारे अजमल, मैया मेना दे॥ ॐ जय श्री रामादे। स्वामी जय श्री रामाद...
पढ़ें →आरती हिंदू धर्म की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र परंपरा है जो सदियों से भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग रही है। यह एक भक्तिमय अनुष्ठान है जिसमें दीपक या कपूर की लौ से देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की जाती है। आरती के समय मंगलमय वातावरण में घंटियों की मधुर ध्वनि, शंख की गूंज और भक्तिगीतों का सामूहिक गायन होता है जो मन को शांति और आत्मा को तृप्ति प्रदान करता है। प्रत्येक देवी-देवता की अपनी विशिष्ट आरती होती है जिसमें उनके गुणों, लीलाओं और महिमा का वर्णन होता है। सुबह और शाम की आरती का विशेष महत्व माना जाता है। आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, नकारात्मकता दूर होती है और भगवान की कृपा प्राप्त होती है। यहां आपको विभिन्न देवी-देवताओं की संपूर्ण आरती संग्रह मिलेगा जिसमें लिखित पाठ के साथ-साथ उनका अर्थ और पूजा विधि भी दी गई है। चाहे आप गणेश जी की आरती हो, लक्ष्मी जी की, हनुमान जी की या किसी भी अन्य देवता की आरती खोज रहे हों, यहां आपको पूर्ण जानकारी मिलेगी।
॥ श्री रामदेव आरती ॥ ॐ जय श्री रामादे स्वामी, जय श्री रामादे। पिता तुम्हारे अजमल, मैया मेना दे॥ ॐ जय श्री रामादे। स्वामी जय श्री रामाद...
पढ़ें →॥ श्री विश्वकर्मा आरती ॥ प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवो, प्रभु विश्वकर्मा। सुदामा की विनय सुनी और कंचन महल बनाये। सकल पदारथ देकर प्रभ...
पढ़ें →॥ आरती — श्री सन्तोषी माँ ॥ जय सन्तोषी माता, मैया जय सन्तोषी माता। अपने सेवक जन को, सुख‑सम्पत्ति दाता॥ जय सन्तोषी माता॥ सुन्दर चीर ...
पढ़ें →॥ आरती — श्री गोवर्धन महाराज की ॥ श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज — तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ। तोपे पान चढ़े, तोपे फूल चढ़े — तोपे च...
पढ़ें →॥ आरती — श्री नरसिंह भगवान की ॥ ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे। स्तम्भ फाड़ प्रभु प्रकटे, जन का ताप हरे॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥ तुम हो...
पढ़ें →॥ आरती — श्री शनिदेव की ॥ जय जय श्री शनिदेव, भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु, छाया महतारी॥ जय जय श्री शनिदेव, भक्तन हितकारी॥ श्या...
पढ़ें →॥ आरती — श्री सूर्यदेव की ॥ जय कश्यप‑नन्दन, ॐ जय अदिति‑नन्दन। त्रिभुवन‑तिमिर‑निकन्दन, भक्त‑हृदय‑चन्दन॥ जय कश्यप‑नन्दन, ॐ जय अदित...
पढ़ें →॥ आरती — श्री सत्यनारायणजी की ॥ जय लक्ष्मी रमणा, श्री जय लक्ष्मी रमणा। सत्यनारायण स्वामी, जन‑पातक हरणा॥ जय लक्ष्मी रमणा॥ रत्नजड़...
पढ़ें →॥ आरती — श्री जगदीशजी की ॥ ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्तजनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ जो ध्यावे फल पावे, ...
पढ़ें →॥ श्री रामायणजी की आरती ॥ आरती श्री रामायण जी की। कीरति कलित ललित सिया‑पी की॥ गावत ब्राह्मादि मुनि नारद, बाल्मीकि विज्ञान‑विशारद। ...
पढ़ें →॥ आरती — श्री रामचन्द्रजी ॥ श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्। नव कञ्ज‑लोचन, कञ्जमुख कर, कञ्ज पद कंजारुणम्॥ श्री रामच...
पढ़ें →॥ आरती — गणपति की सेवा ॥ गणपति की सेवा, मंगल मेवा; सेवा से सब विघ्न टरैं। तीन लोक के सकल देवता, द्वार खड़े नित अर्ज करैं॥ गणपति की सेवा, ...
पढ़ें →॥ आरती — गजबदन विनायक की ॥ आरती गजबदन विनायक की। सुर‑मुनि‑पूजित गणनायक की॥ आरती गजबदन विनायक की। सुर‑मुनि‑पूजित गणनायक की॥ एकदन...
पढ़ें →॥ आरती — श्री बालाजी / हनुमानजी की ॥ ॐ जय हनुमत वीरा, स्वामी जय हनुमत वीरा। संकट मोचन स्वामी, तुम हो रणधीर॥ ॐ जय हनुमत वीरा॥ पवनपुत्र ...
पढ़ें →॥ श्री अम्बे — जगदम्बे काली आरती ॥ अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्परवाली। तेरे ही गुण गायें भारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आर...
पढ़ें →॥ आरती — श्री सत्यनारायणजी की ॥ जय लक्ष्मी रमणा, श्री लक्ष्मी रमणा। सत्यनारायण स्वामी, जन‑पातक हरणा॥ जय। रत्नजटित सिंहासन, अद्भु...
पढ़ें →॥ आरती — शिवजी की ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव — अर्धांगिनी धाराः॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ एकानन, चतुर...
पढ़ें →॥ आरती — श्री हनुमानजी की ॥ आर्ती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥ आर्ती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥ जाक...
पढ़ें →