त्रिपुरा सुन्दरी आरती - ललिता महात्रिपुरा सुन्दरी

त्रिपुरा सुन्दरी माता दस महाविद्याओं में से एक हैं, जिन्हें ललिता पीठ के रूप में भी जाना जाता है। माता की दिव्य आरती उनके सौंदर्य और अनंत शक्ति का गुणगान करती है। श्रद्धापूर्वक आरती करने से भक्तों को सौंदर्य, ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है। यह आरती शक्ति और शिव के संतुलन का प्रतीक है, जो जीवन में संतुलन लाती है।

त्रिपुरा सुन्दरी आरती | Tripura Sundari / Lalita Peeth Aarti

Aarti Goddesses Aarti Shakti Peeth ( शक्ति‑पीठ )
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परिचय

त्रिपुरा सुन्दरी (ललिता) का प्राचीन मंदिर भारत के उत्तर‑पूर्व में, त्रिपुरा राज्य के उदयपुर में स्थित है और यह शक्ति‑परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे ललिता त्रिपुरसुंदरी के नाम से भी जाना जाता है और यहाँ श्रीविद्या की परम्परा, श्रीचक्र पूजन और ललिता सहस्रनाम के पाठ के लिए विशेष श्रद्धा है। लोकश्रद्धा में यह स्थान शक्ति‑पीठों से जुड़ा हुआ माना जाता है और भक्त यहाँ माँ की कृपा, मनोकामना‑सिद्धि और संकटों से मुक्ति की कामना लेकर आते हैं। त्रिपुरा सुन्दरी मंदिर अपने वार्षिक उत्सव, आध्यात्मिक अनुष्ठान और स्थानीय धार्मिक परंपराओं के कारण दूर‑दूर से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

त्रिपुरा सुन्दरी आरती | Tripura Sundari / Lalita Peeth Aarti

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॥ आरती — त्रिपुरा सुन्दरी माता ॥

जय त्रिपुरा सुन्दरी, जय जय ललिता माता।
जय करुणा की मूरत, जग भक्तन की घटा॥
जय त्रिपुरा सुन्दरी, जय जय ललिता माता।

कमलासन सुभूषित तेरी, मणि मुकुट शोभित भारी।
श्रीचक्र रूप धारिणी, करुणा अनंत अपारी।
जय त्रिपुरा सुन्दरी…

त्रिपुरा के धाम की तू, आराध्या माँ अनोखी।
भक्तन की हर पीड़ा तू, कर दे तर्जनी से रोकी।
जय त्रिपुरा सुन्दरी…

ललिता‑सहस्रनाम गुणगान, मंत्रों से जो करे नमन।
श्रीविद्या का जो रक्षक, भक्त के हृदय को धन।
जय त्रिपुरा सुन्दरी…

त्रिगुण शुद्धि करावे, मोक्ष‑मार्ग की दे राह।
जो तेरे चरण धरें सदा, मिटे सब क्लेश भाग।
जय त्रिपुरा सुन्दरी…

नयन तुम्हारे तेजोमय, वक्षस्थल में करुणा भारी।
दुःख हरने वाली माता, वरदान दे जीवन सवारी।
जय त्रिपुरा सुन्दरी…

शाक्ति स्वरूप त्रिपुरा, लोकनाथ त्रिभुवन प्यारी।
भक्ति भाव से जो गावे, पावे माता की दियारी।
जय त्रिपुरा सुन्दरी…

भक्तों के हिरदय में रहो, कृपा कर दया बनकर।
हम सब पर अपना वर दओ, संकट मिटा कर धनकर।
जय त्रिपुरा सुन्दरी, जय जय ललिता माता।