मनिहारी का भेष बनाया (श्याम चूड़ी बेचने आया)
🎵 श्याम चूड़ी बेचने आया (पूर्ण भजन लिरिक्स) मनिहारी का भेष बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया। मनिहारी का भेष बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥ छ...
पढ़ें →यह भजन कृष्ण के द्वारपालों से निवेदन का गीत है। भक्त द्वारपालों से कृष्ण को संदेश देने की विनती करते हैं। कृष्ण को कन्हैया कहकर पुकारा गया है। मथुरा-वृंदावन की भक्ति परंपरा का हिस्सा है। भजन में भक्ति और प्रेम का सुंदर संगम है। गाने से कृष्ण दर्शन की तीव्र इच्छा जागती है और मन भक्तिरस से भर जाता है।
देखो देखो ये गरीबी,ये गरीबी का हाल
कृष्ण के दर पे विश्वास लेके आया हूँ
मेरे बचपन का यार है.. मेरा श्याम,
यही सोच कर मै आस कर के आया हूँ.
अरे द्वारपालो कन्हैया से कह दो
के दरपे सुदामा गरीब आ गया है
भटकते भटकते ना जाने कहा से
तुम्हारे महल के करीब आगया है
ना सरपे है पगडी ना तन पे है जामा,
बतादो कन्हैया को नाम है सुदामा हा…
बतादो कन्हैया को नाम है सुदामा.
बस एक बार मोहन से जा कर के कह दो
के मिलने सखा बदनसीब आ गया है
अरे द्वारपालो कन्हैया से कहदो
के दरपे सुदामा गरीब आगया है
सुनते ही दौड़े चले आये मोहन,
लगाया गले से सुदामा को मोहन हा…
लगाया गले से सुदामा को मोहन
हुआ रुख्मिणी को बहुत ही अचंभा
ये मेहमान कैसा अजीब आगया है
बराबर में अपने सुदामा बिठाये
चरण आँसुओं से श्याम ने धुलाये
चरण आँसुओं से श्याम ने धुलाये
ना घबरायो प्यारे जरा तुम सुदामा
खुशी का समां तेरे करीब आ गया है
अरे द्वारपालो कन्हैया से कह दो
के दरपे सुदामा गरीब आगया है