ज्येष्ठ मास - ग्रीष्म का गहन समय और विशेष व्रत

ज्येष्ठ मास हिंदू पंचांग का तीसरा महीना है जो मई-जून में आता है और वर्ष का सबसे गर्म महीना माना जाता है। यह माह ग्रीष्म ऋतु के चरम पर होता है। ज्येष्ठ मास में गंगा दशहरा का महत्वपूर्ण पर्व मनाया जाता है जिस दिन मां गंगा का अवतरण हुआ था। इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है और लाखों श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। निर्जला एकादशी भी इसी मास में आती है जो सभी एकादशियों में सबसे कठिन मानी जाती है। इस व्रत में पानी भी नहीं पिया जाता। ज्येष्ठ की पूर्णिमा को वट पूर्णिमा या वट सावित्री व्रत मनाया जाता है जो सुहागिन स्त्रियों द्वारा अपने पति की दीर्घायु के लिए किया जाता है। गर्मी के मौसम में जलदान, शीतल जल की व्यवस्था और प्याऊ लगाना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। ज्येष्ठ मास में छाया में विश्राम करने वाले पक्षियों और जानवरों की सेवा करना धर्म का कार्य माना जाता है। यहां आपको ज्येष्ठ मास के सभी व्रत-पर्वों की जानकारी मिलेगी। गंगा दशहरा, निर्जला एकादशी और वट सावित्री व्रत की विधि और महत्व विस्तार से बताया गया है।

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