गणेश जी की खीर कथा (Ganesh ji Ki Kheer Katha)
गणेश जी की खीर कथा (Ganesh ji Ki Kheer Katha) एक बार गणेश जी एक छोटे बालक के रूप में चिमटी में चावल और चमचे में दूध लेकर निकले। वो हर किसी से कह रहे थे कि ...
पढ़ें →बिंदायक जी की व्रत कथा भारतीय संस्कृति की एक महत्वपूर्ण पारंपरिक कथा है जो पीढ़ियों से चली आ रही है। यह कथा विशेष रूप से राजस्थान और उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में अत्यंत लोकप्रिय है। बिंदायक जी का व्रत मुख्य रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है। इस व्रत के पीछे एक प्रेरणादायक कथा है जो भक्ति, श्रद्धा और विश्वास की महत्ता को दर्शाती है। कथा के अनुसार, एक निष्ठावान महिला अपनी श्रद्धा और व्रत के बल पर अपने परिवार को सभी संकटों से बचाती है। बिंदायक जी का व्रत करने से घर में शांति, समृद्धि और सुख-सौभाग्य की वृद्धि होती है। व्रत के दिन विशेष पूजा-विधि के साथ कथा सुनने का विधान है। यह व्रत साल में एक बार विशेष तिथि पर किया जाता है। यहां आपको बिंदायक जी की संपूर्ण कथा, व्रत विधि, पूजा सामग्री की सूची, व्रत के नियम और व्रत खोलने की विधि विस्तार से मिलेगी। कथा के साथ-साथ इसका धार्मिक महत्व और लाभ भी बताया गया है।
गणेश जी की खीर कथा (Ganesh ji Ki Kheer Katha) एक बार गणेश जी एक छोटे बालक के रूप में चिमटी में चावल और चमचे में दूध लेकर निकले। वो हर किसी से कह रहे थे कि ...
पढ़ें →एक शहर में देवरानी जेठानी रहती थी । देवरानी गरीब थी और जेठानी अमीर थी । देवरानी गणेश जी की भक्त थी। देवरानी का पति जंगल से लकड़ी काट कर ब...
पढ़ें →एक विधवा मालिन थी। उसके चार साल का बच्चा उसकी सास उसके साथ बहुत बुरा व्यवहार करती थी। एक दिन की बात सास ने पोते-बहू को घर से निकाल दिया। ...
पढ़ें →तिल चौथ की कहानी – किसी शहर में एक सेठ – सेठानी रहते थे । उनके कोई भी संतान नहीं थी । इससे दोनों जने दुःखी रहते थे । एक बार सेठानी ने पड...
पढ़ें →एक गांव में एक भाई-बहिन रहते थे। बहिन का नियम था कि वह भाई का मुंह देखकर ही खाना खाती थी। बहिन की दूसरे गांव में शादी कर दी गई। वह ससुराल ...
पढ़ें →एक मेंढक और एक मेंढकी थे। मेंढकी रोज गणेशजी का नाम लेती थी। एक दिन मेंढक ने कहा, "तू पराये पुरुष का नाम क्यों लेती है? अगर तू नाम लेगी तो...
पढ़ें →एक मेंढक और मेंढकी थे। मेंढकी रोज़ गणेश जी की कहानी कहती थी। एक दिन मेंढक बोला कि तू पराये पुरुष का नाम क्यों लेती है ?अगर तू लेगी तो मैं त...
पढ़ें →एक बार की बात है, एक गरीब और दृष्टिहीन बुढ़िया थी। उनके साथ उनका बेटा और बहू भी रहते थे। बुढ़िया हमेशा भगवान श्री गणेश की पूजा करती थी। ...
पढ़ें →एक समय की बात है, एक ब्राह्मण और उनकी पत्नी थीं। उनके पास एक पुत्र था जिनका नाम था। वह छोटा सा बच्चा गणेश जी का बड़ा भक्त था। वह दिन-रात ग...
पढ़ें →एक छोटो सो छोरो आपका घरां से लड़ कर निकलगो और बोल्यो कि आज तो बिन्दायकजी स मिलकर ही घरां पाछो जाऊँगा । छोरो जातो-जातो बावनी-उजाड़ म चल्य...
पढ़ें →एक गाँव में माँ-बेटी रहती थीं। एक दिन वह अपनी माँ से कहने लगी कि गाँव के सब लोग गणेश मेला देखने जा रहे हैं, मैं भी मेला देखने जाऊँगी। माँ ...
पढ़ें →एक ब्राह्मण था, जो नित्य प्रतिदिन सुबह उठकर गंगा जी में स्नान के लिए जाता और फिर बिंदायक जी की पूजा करता था, साथ ही बिंदायक जी की कहानिय...
पढ़ें →भगवान विष्णु माता लक्ष्मी जी से विवाह के लिए जाने लगे तब सारे देवी देवताओं को बारात में जाने के लिए बुलाया गया। जब सभी देवता गण जाने लग...
पढ़ें →एक अन्धी बुढ़िया माई के बेटाव बहू थे । वे लोग बहुत गरीब थे । बुढ़िया माई रोज गणेश जी की पूजा करती थी । एक दिन गणेश जी उससे प्रसन्न हुये ओर...
पढ़ें →एक गांव में एक ब्राह्मण व उसकी पत्नी रहते थे । ब्राह्मण देव बड़े ही श्री गणेश भक्त थे। उसने अपने घर में ही एक छोटा-सा सुन्दर-सा भगवान श्...
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