जाटका भाटका की कहानी
जाटका—भाटका की कहानी | विश्राम देवता की कहानी | नगर बसेरा की कहानी विश्राम देवता के समय किसी गाँव में एक भाटका और एक जाटका रहते थे; दो...
पढ़ें →आषाढ़ मास हिंदू कैलेंडर का चौथा महीना है जो जून-जुलाई में आता है और वर्षा ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है। यह माह अनेक धार्मिक अनुष्ठानों और व्रतों के लिए जाना जाता है। आषाढ़ मास में गुरु पूर्णिमा का महत्वपूर्ण पर्व मनाया जाता है जब गुरुओं और शिक्षकों का सम्मान किया जाता है। इस महीने में रथयात्रा भी होती है जो भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध यात्रा है। आषाढ़ की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है जिससे चातुर्मास का प्रारंभ होता है। इस माह में व्रत करने से विशेष पुण्य मिलता है। वर्षा ऋतु होने के कारण यह समय प्रकृति पूजन के लिए भी उपयुक्त है। इस मास में पूर्णिमा के दिन विशेष पूजा और व्रत का विधान है। आषाढ़ मास में मंदिरों में विशेष अनुष्ठान और यज्ञ किए जाते हैं। यहां आपको आषाढ़ मास के सभी व्रत-त्योहारों की जानकारी मिलेगी। गुरु पूर्णिमा, रथयात्रा और देवशयनी एकादशी की विधि, महत्व और कथाएं विस्तार से बताई गई हैं। चातुर्मास में किए जाने वाले व्रतों और धार्मिक नियमों की भी पूरी जानकारी दी गई है।
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