अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो लिरिक्स | Are Dwarpalo Kanhaiya Se Keh Do Lyrics
शीश पगा न झगा तन पे, प्रभु जानै को आहि बसै केहि ग्रामा। धोती फटी-सी लटी दुपटी, अरु पाँय उपानह को नहिं नामा॥ अरे द्वारपालों कन्हैया से क...
पढ़ें →कीर्तन और भजनों की महफिल में अगर 'मनिहारी का भेष बनाया' न गाया जाए तो प्रोग्राम अधूरा लगता है। कान्हा का बरसाने जाना और सखियों के साथ उनकी नोक-झोंक इस भजन को खास बनाती है। अपनी डायरी में नोट करने के लिए यहाँ देखें इस भजन के पूरे लिरिक्स।
🎵 श्याम चूड़ी बेचने आया (पूर्ण भजन लिरिक्स)
मनिहारी का भेष बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया। मनिहारी का भेष बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥
छोड़ के मुकुट लटें बिखराईं, माथे पे बिंदिया लगाई। नैनों में कजरा सजाया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥ मनिहारी का भेष बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया।
पहन के साड़ी चाल बदली, पहनी पाँव में पायलिया। हाथों में टोकना उठाया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥ मनिहारी का भेष बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया।
गलियों में आवाज़ लगाई, ले लो चूड़ी ले लो चूड़ी। बरसाने की गली में आया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥ मनिहारी का भेष बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया।
सुन के आवाज़ राधा जी आईं, पास बुला के ये बोलीं। चूड़ी कौन सी रंग की लाया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥ मनिहारी का भेष बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया।
जैसे ही हाथ थाम लिया चूड़ी को, राधा जी तो समझ ही गईं। कान्हा ने अपना रंग दिखाया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥ मनिहारी का भेष बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया।
मनिहारी का भेष बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया। श्याम चूड़ी बेचने आया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥