मनिहारी का भेष बनाया – श्री कृष्ण का सबसे प्यारा भजन

कीर्तन और भजनों की महफिल में अगर 'मनिहारी का भेष बनाया' न गाया जाए तो प्रोग्राम अधूरा लगता है। कान्हा का बरसाने जाना और सखियों के साथ उनकी नोक-झोंक इस भजन को खास बनाती है। अपनी डायरी में नोट करने के लिए यहाँ देखें इस भजन के पूरे लिरिक्स।

मनिहारी का भेष बनाया (श्याम चूड़ी बेचने आया)

Bhajan Kanhaiya ji Bhajan Krishna ji Bhajan
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परिचय

कृष्ण भक्ति के रसों में डूबा यह भजन बहुत ही कर्णप्रिय है। इसमें बताया गया है कि कैसे सांवरे ने माथे पर बिंदिया लगाई और साड़ी पहनकर मनिहारी बन गए। पढ़िए इस सुंदर भजन के लिरिक्स।

One of the most melodious bhajans depicting Krishna's 'Manihari' avatar. This song is a staple in every Krishna-related celebration. Get the complete lyrics in Hindi here.

मनिहारी का भेष बनाया (श्याम चूड़ी बेचने आया)

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🎵 श्याम चूड़ी बेचने आया (पूर्ण भजन लिरिक्स)
मनिहारी का भेष बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया। मनिहारी का भेष बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥

छोड़ के मुकुट लटें बिखराईं, माथे पे बिंदिया लगाई। नैनों में कजरा सजाया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥ मनिहारी का भेष बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया।

पहन के साड़ी चाल बदली, पहनी पाँव में पायलिया। हाथों में टोकना उठाया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥ मनिहारी का भेष बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया।

गलियों में आवाज़ लगाई, ले लो चूड़ी ले लो चूड़ी। बरसाने की गली में आया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥ मनिहारी का भेष बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया।

सुन के आवाज़ राधा जी आईं, पास बुला के ये बोलीं। चूड़ी कौन सी रंग की लाया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥ मनिहारी का भेष बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया।

जैसे ही हाथ थाम लिया चूड़ी को, राधा जी तो समझ ही गईं। कान्हा ने अपना रंग दिखाया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥ मनिहारी का भेष बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया।

मनिहारी का भेष बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया। श्याम चूड़ी बेचने आया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥