बृहस्पतिवार प्रदोष कथा – दुश्मन खत्म और जीत का व्रत

बृहस्पतिवार प्रदोष व्रत की यह पवित्र कथा दुश्मनों को हराने और लड़ाई में जीत पाने के लिए बेहद असरदार है। जब त्रयोदशी के दिन गुरुवार पड़ता है, तब भगवान शिव की पूजा करने से दुश्मनों पर जीत मिलती है। इस कथा में देवराज इंद्र और वृत्रासुर की लड़ाई का जिक्र है। गुरु बृहस्पति ने देवताओं को प्रदोष व्रत करने की सलाह दी जिसके असर से उन्हें जीत मिली। जो भी गुरु प्रदोष व्रत करता है, उसके सभी दुश्मन नष्ट हो जाते हैं और जीत मिलती है।

बृहस्पतिवार प्रदोष कथा | गुरु प्रदोष व्रत का महत्व

Vrat Katha धार्मिक कथाएँ (Religious Stories) पूजा विधि (Puja Vidhi) प्रदोष व्रत व्रत एवं उपवास (Fasting & Vrat)
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परिचय

बृहस्पतिवार प्रदोष व्रत की यह पावन कथा दुश्मन नाश और लड़ाई में जीत पाने का शक्तिशाली तरीका है। जब त्रयोदशी तिथि पर गुरुवार आता है, उस दिन भगवान शिव की आराधना करने से दुश्मनों पर विजय मिलती है। यह व्रत सभी दिनों में सबसे अच्छा माना गया है। जो भी व्यक्ति विधि से यह व्रत करता है, उसके सभी दुश्मन खत्म हो जाते हैं और उसे जीत मिलती है।

This sacred Thursday Pradosh Vrat Katha is a powerful method for enemy destruction and victory in battle. When Thursday comes on Trayodashi tithi, worshipping Lord Shiva brings victory over enemies. This fast is considered the best among all days. Whoever observes this fast properly, all their enemies are destroyed and they attain victory.

बृहस्पतिवार प्रदोष कथा | गुरु प्रदोष व्रत का महत्व

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🙏 बृहस्पतिवार प्रदोष व्रत कथा 🙏

एक बार इंद्र और वृत्रासुर में घनघोर युद्ध हुआ। देवताओं ने दैत्य सेना को पराजित कर नष्ट-भ्रष्ट कर दी। अपना विनाश देख वृत्रासुर अत्यंत क्रोधित हो स्वयं युद्ध के लिए उद्यत हुआ। 

मायावी असुर ने आसुरी माया से भयंकर विकराल रूप धारण किया। उसके स्वरूप को देख इंद्रादिक देवताओं ने परम गुरु बृहस्पति जी का आह्वान किया।

गुरु तत्काल आकर कहने लगे - "हे देवेंद्र! अब तुम वृत्रासुर की कथा ध्यान से सुनो - वृत्रासुर प्रथम बड़ा तपस्वी कर्मनिष्ठ था। इसने गंधमादन पर्वत पर उग्र तप करके शिवजी को प्रसन्न किया था।"

"पूर्व समय में यह चित्ररथ नाम का राजा था। एक समय चित्ररथ कैलाश पर्वत गया। भगवान का स्वरूप और वाम अंग में जगदंबा को विराजमान देखकर चित्ररथ हंसा।"

"चित्ररथ बोला - 'हे प्रभो! हम स्त्रियों के वशीभूत रहते हैं किंतु देव लोक में ऐसा नहीं दिखा कि कोई स्त्री सहित सभा में बैठे।'"

"यह सुनकर पार्वती क्रोधित हो बोलीं - 'ओ दुष्ट! तूने सर्वव्यापी महेश्वर और मेरी हंसी उड़ाई है। तुझे अपने कर्मों का फल भोगना पड़ेगा। तू दैत्य स्वरूप धारण कर विमान से नीचे गिर।'"

"जब जगदंबा ने शाप दिया तो चित्ररथ तत्क्षण विमान से गिरकर राक्षस योनि को प्राप्त हो गया और वृत्रासुर नाम से प्रसिद्ध हुआ। वह शिव भक्ति में रहा। इस कारण तुम उसे जीत नहीं सकते।"

"अतः मेरे परामर्श से प्रदोष व्रत करो जिससे महाबलशाली दैत्य पर विजय प्राप्त कर सको।"

गुरुदेव के वचन सुनकर सब देवता प्रसन्न हुए और गुरुवार त्रयोदशी प्रदोष व्रत विधि-विधान से किया।

🙏 ॐ नमः शिवाय 🙏

 

📌 PUJA VIDHI:
- सुबह नहाना जरूरी
- शिव पूजन करें
- व्रत नियम मानें

📌 व्रत के लाभ 
- दुश्मन खत्म होते हैं
- लड़ाई में जीत मिलती है
- मुसीबतें दूर होती हैं

 

 

📌 प्रदोष व्रत का परिचय

**प्रदोष क्या है:**

प्रदोष का तात्पर्य उस समय से है जब सूर्य अस्त हो जाता है और रात्रि का आगमन होने वाला होता है। यह संध्या और रात्रि के मध्य का काल होता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार यह समय भगवान शिव की उपासना के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इस काल में महादेव की आराधना करने से असाधारण फल प्राप्त होता है।

**व्रत कैसे करें:**

त्रयोदशी की तिथि पर व्रत रखने वाले को पूरे दिन कुछ भी नहीं खाना चाहिए। शाम के समय जब सूरज डूबने में तीन घड़ी बची हो, तब स्नान करके साफ सफेद कपड़े पहन लें। इसके बाद संध्या वंदन करके भगवान शिव की पूजा शुरू करें।

पूजा करने की जगह को पानी से साफ करके वहां मंडप बना लें। पांच रंगों के फूलों से कमल का आकार बनाएं और कुश का आसन बिछा दें। आसन पर पूर्व दिशा में मुंह करके बैठें। फिर भगवान महादेव का ध्यान करें।

**भगवान शिव का ध्यान:**

करोड़ों चांदों जैसी चमक वाले, तीन आंखों वाले, सिर पर चांद धारण करने वाले, भूरे रंग की जटाएं रखने वाले, नीले गले वाले, अनेक रुद्राक्ष की मालाओं से सजे हुए, आशीर्वाद देने वाले हाथ वाले, त्रिशूल धारण करने वाले, नागों के कुंडल पहने हुए, बाघ की खाल ओढ़े हुए, रत्नों से जड़े सिंहासन पर बैठे भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए।

**व्रत का समापन कैसे करें:**

सुबह नहा-धोकर रंग-बिरंगे कपड़ों से मंडप सजाएं। उस मंडप में शिव-पार्वती की मूर्ति रखकर विधि से पूजा करें। फिर शिव-पार्वती के लिए खीर से हवन करना चाहिए।

हवन करते समय 'ॐ उमा सहित शिवाय नमः' मंत्र बोलकर १०८ बार आहुति डालें। इसी तरह 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र से भगवान शंकर के लिए आहुति दें। हवन पूरा होने पर किसी धार्मिक व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार दान दें।

इसके बाद ब्राह्मणों को खाना खिलाएं और दक्षिणा दें। ब्राह्मणों से कहलवाएं कि व्रत पूरा हुआ। ब्राह्मणों की आज्ञा लेकर अपने परिवार वालों के साथ भगवान शंकर को याद करते हुए भोजन करें।

इस तरह व्रत का समापन करने से व्रत रखने वाले को पुत्र-पौत्र की प्राप्ति होती है और स्वास्थ्य अच्छा रहता है। साथ ही दुश्मनों पर जीत मिलती है और सभी पापों से छुटकारा मिलता है। यह स्कंद पुराण में लिखा गया है।

**त्रयोदशी व्रत क्यों महत्वपूर्ण है:**

त्रयोदशी यानी प्रदोष व्रत करने वाला व्यक्ति हमेशा खुश रहता है। इस व्रत के प्रभाव से सभी पापों का नाश हो जाता है। यह व्रत करने से विधवा स्त्रियों को अधर्म से घृणा होती है और सुहागन स्त्रियों का सुहाग स्थिर रहता है। कैदी को जेल से मुक्ति मिलती है।

जो स्त्री-पुरुष जिस इच्छा से यह व्रत रखते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं कैलाश के स्वामी भगवान शंकर पूरी करते हैं। सूत जी बताते हैं कि त्रयोदशी व्रत करने वाले को सौ गायों के दान जितना पुण्य मिलता है।

इस व्रत को जो सही तरीके से और पूरे मन से करता है, उसके सभी दुख दूर हो जाते हैं। सभी महिलाओं को ग्यारह त्रयोदशी या पूरे साल की २६ त्रयोदशी पूरी करने के बाद उद्यापन करना चाहिए।

**प्रदोष व्रत में दिनों का महत्व:**

त्रयोदशी तिथि पर जो भी दिन पड़ता है, उसी दिन के हिसाब से व्रत करना चाहिए और उसी दिन की कथा पढ़नी या सुननी चाहिए। खासतौर पर रविवार, सोमवार और शनिवार के प्रदोष व्रत जरूर करने चाहिए। इन सभी से मनचाहा फल मिलता है।

**अलग-अलग दिनों के प्रदोष व्रत:**

१. **रविवार का प्रदोष व्रत** - लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रविवार प्रदोष व्रत रखें।

२. **सोमवार का प्रदोष व्रत** - ग्रहों की खराब दशा दूर करने के लिए सोमवार प्रदोष व्रत करें।

३. **मंगलवार का प्रदोष व्रत** - बीमारियों से छुटकारा और स्वास्थ्य के लिए मंगलवार प्रदोष व्रत रखें।

४. **बुधवार का प्रदोष व्रत** - सभी इच्छाओं की पूर्ति के लिए बुधवार प्रदोष व्रत करें।

५. **गुरुवार का प्रदोष व्रत** - दुश्मनों के नाश के लिए गुरुवार प्रदोष व्रत रखें।

६. **शुक्रवार का प्रदोष व्रत** - सौभाग्य और स्त्री की समृद्धि के लिए शुक्रवार प्रदोष व्रत करें।

७. **शनिवार का प्रदोष व्रत** - खोया राज्य और पद पाने के लिए शनिवार प्रदोष व्रत रखें।

**व्रत से क्या लाभ होता है:**

प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति को ये लाभ मिलते हैं:

• सभी पापों से मुक्ति मिलती है
• धन-दौलत की प्राप्ति होती है
• संतान का सुख मिलता है
• अच्छा स्वास्थ्य मिलता है
• दुश्मनों पर विजय मिलती है
• मनोकामनाएं पूरी होती हैं
• जेल से छुटकारा मिलता है
• सुहाग स्थिर रहता है
• राज्य और पद की प्राप्ति होती है

**जरूरी बातें:**

- व्रत के दिन कुछ नहीं खाएं
- प्रदोष काल में पूजा जरूर करें
- सफेद कपड़े पहनें
- बेल पत्र जरूर चढ़ाएं
- ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें
- ब्राह्मणों को खाना और दक्षिणा दें
- कथा जरूर सुनें