महाशिवरात्रि व्रत कथा | शिव पार्वती विवाह और पूजा विधि
🙏 महाशिवरात्रि व्रत कथा 🙏 **महाशिवरात्रि का महत्व:** महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का सर्वाधिक पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है। यह व्रत फाल...
पढ़ें →शनिवार प्रदोष व्रत की यह पवित्र कथा गरीबी हटाने, राज्य और पद पाने के लिए बेहद असरदार है। जब त्रयोदशी के दिन शनिवार पड़ता है, तब भगवान शिव की पूजा करने से गरीबी दूर होती है और धन-संपत्ति मिलती है। इस कथा में एक गरीब ब्राह्मणी और उसके दो बेटों की कहानी है। शांडिल्य ऋषि की सलाह पर उन्होंने प्रदोष व्रत किया। व्रत के असर से धन मिला और राजकुमार को राज्य मिला। जो भी शनि प्रदोष व्रत करता है, उसकी गरीबी दूर होती है और राज्य-पद मिलता है।
🙏 शनिवार प्रदोष व्रत कथा 🙏
गर्गाचार्य जी ने कहा - "हे महामते! अब हम शनि प्रदोष विधि सुनने की इच्छा रखते हैं।"
सूत जी बोले - "पुरातन कथा है कि एक निर्धन ब्राह्मण की स्त्री दरिद्रता से दुखी हो शांडिल्य ऋषि के पास गई।"
"उसने कहा - 'हे महामुने! मैं अत्यंत दुखी हूं। दुख निवारण का उपाय बताएं। मेरे दोनों पुत्र आपकी शरण में हैं। ज्येष्ठ पुत्र का नाम धर्म है जो राजपुत्र है और लघु पुत्र का नाम शुचिव्रत है। हम दरिद्र हैं।'"
"ऋषि ने शिव प्रदोष व्रत करने को कहा। तीनों प्राणी प्रदोष व्रत करने लगे। कुछ समय बाद प्रदोष व्रत आया। तीनों ने व्रत का संकल्प लिया।"
"छोटा लड़का शुचिव्रत तालाब पर स्नान करने गया तो मार्ग में स्वर्ण कलश धन से भरपूर मिला। उसे लेकर वह घर आया। प्रसन्न होकर माता से बोला - 'माँ! यह धन मार्ग से प्राप्त हुआ है।'"
"माता ने धन देखकर शिव महिमा का वर्णन किया। राजपुत्र को बुलाकर बोली - 'देखो पुत्र, यह धन शिवजी की कृपा से प्राप्त हुआ है। प्रसाद के रूप में आधा-आधा बांट लो।'"
"राजपुत्र ने शिव-पार्वती का ध्यान किया और बोला - 'यह धन आपके पुत्र का है, मैं अधिकारी नहीं। मुझे भगवान शंकर और माता पार्वती जब देंगे तब लूंगा।'"
"एक दिन दोनों भाइयों का प्रदेश भ्रमण का विचार हुआ। वहां उन्होंने अनेक गंधर्व कन्याओं को क्रीड़ा करते देखा। राजपुत्र स्त्रियों के बीच पहुंचा।"
"एक सुंदरी राजकुमार को देख मोहित हो गई। उसका नाम अंशुमति था। वह बिद्रविक नामक गंधर्व की पुत्री थी। उसने मोतियों का हार राजकुमार के गले में डाल दिया।"
"तीसरे दिन गंधर्वराज अपनी कन्या को लेकर आया। उसने कहा - 'मैं कैलाश गया था। शंकर जी ने कहा कि धर्मगुप्त नाम का राजपुत्र मेरा परम भक्त है। तुम उसकी सहायता करो।'"
"गंधर्वराज ने कन्या का विधिवत विवाह कर दिया। विशेष धन और सुंदर गंधर्व कन्या पाकर राजपुत्र प्रसन्न हुआ। भगवत कृपा से वह समयोपरांत अपने शत्रुओं को दमन करके राज्य का सुख भोगने लगा।"
🙏 ॐ नमः शिवाय 🙏
📌 PUJA VIDHI :
- सुबह नहाना जरूरी
- शिव पूजन करें
- व्रत नियम मानें
📌 व्रत के लाभ :
- गरीबी खत्म होती है
- राज्य मिलता है
- पद मिलता है
- धन-संपत्ति आती है
📌 प्रदोष व्रत का परिचय
**प्रदोष क्या है:**
प्रदोष का तात्पर्य उस समय से है जब सूर्य अस्त हो जाता है और रात्रि का आगमन होने वाला होता है। यह संध्या और रात्रि के मध्य का काल होता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार यह समय भगवान शिव की उपासना के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इस काल में महादेव की आराधना करने से असाधारण फल प्राप्त होता है।
**व्रत कैसे करें:**
त्रयोदशी की तिथि पर व्रत रखने वाले को पूरे दिन कुछ भी नहीं खाना चाहिए। शाम के समय जब सूरज डूबने में तीन घड़ी बची हो, तब स्नान करके साफ सफेद कपड़े पहन लें। इसके बाद संध्या वंदन करके भगवान शिव की पूजा शुरू करें।
पूजा करने की जगह को पानी से साफ करके वहां मंडप बना लें। पांच रंगों के फूलों से कमल का आकार बनाएं और कुश का आसन बिछा दें। आसन पर पूर्व दिशा में मुंह करके बैठें। फिर भगवान महादेव का ध्यान करें।
**भगवान शिव का ध्यान:**
करोड़ों चांदों जैसी चमक वाले, तीन आंखों वाले, सिर पर चांद धारण करने वाले, भूरे रंग की जटाएं रखने वाले, नीले गले वाले, अनेक रुद्राक्ष की मालाओं से सजे हुए, आशीर्वाद देने वाले हाथ वाले, त्रिशूल धारण करने वाले, नागों के कुंडल पहने हुए, बाघ की खाल ओढ़े हुए, रत्नों से जड़े सिंहासन पर बैठे भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए।
**व्रत का समापन कैसे करें:**
सुबह नहा-धोकर रंग-बिरंगे कपड़ों से मंडप सजाएं। उस मंडप में शिव-पार्वती की मूर्ति रखकर विधि से पूजा करें। फिर शिव-पार्वती के लिए खीर से हवन करना चाहिए।
हवन करते समय 'ॐ उमा सहित शिवाय नमः' मंत्र बोलकर १०८ बार आहुति डालें। इसी तरह 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र से भगवान शंकर के लिए आहुति दें। हवन पूरा होने पर किसी धार्मिक व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार दान दें।
इसके बाद ब्राह्मणों को खाना खिलाएं और दक्षिणा दें। ब्राह्मणों से कहलवाएं कि व्रत पूरा हुआ। ब्राह्मणों की आज्ञा लेकर अपने परिवार वालों के साथ भगवान शंकर को याद करते हुए भोजन करें।
इस तरह व्रत का समापन करने से व्रत रखने वाले को पुत्र-पौत्र की प्राप्ति होती है और स्वास्थ्य अच्छा रहता है। साथ ही दुश्मनों पर जीत मिलती है और सभी पापों से छुटकारा मिलता है। यह स्कंद पुराण में लिखा गया है।
**त्रयोदशी व्रत क्यों महत्वपूर्ण है:**
त्रयोदशी यानी प्रदोष व्रत करने वाला व्यक्ति हमेशा खुश रहता है। इस व्रत के प्रभाव से सभी पापों का नाश हो जाता है। यह व्रत करने से विधवा स्त्रियों को अधर्म से घृणा होती है और सुहागन स्त्रियों का सुहाग स्थिर रहता है। कैदी को जेल से मुक्ति मिलती है।
जो स्त्री-पुरुष जिस इच्छा से यह व्रत रखते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं कैलाश के स्वामी भगवान शंकर पूरी करते हैं। सूत जी बताते हैं कि त्रयोदशी व्रत करने वाले को सौ गायों के दान जितना पुण्य मिलता है।
इस व्रत को जो सही तरीके से और पूरे मन से करता है, उसके सभी दुख दूर हो जाते हैं। सभी महिलाओं को ग्यारह त्रयोदशी या पूरे साल की २६ त्रयोदशी पूरी करने के बाद उद्यापन करना चाहिए।
**प्रदोष व्रत में दिनों का महत्व:**
त्रयोदशी तिथि पर जो भी दिन पड़ता है, उसी दिन के हिसाब से व्रत करना चाहिए और उसी दिन की कथा पढ़नी या सुननी चाहिए। खासतौर पर रविवार, सोमवार और शनिवार के प्रदोष व्रत जरूर करने चाहिए। इन सभी से मनचाहा फल मिलता है।
**अलग-अलग दिनों के प्रदोष व्रत:**
१. **रविवार का प्रदोष व्रत** - लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रविवार प्रदोष व्रत रखें।
२. **सोमवार का प्रदोष व्रत** - ग्रहों की खराब दशा दूर करने के लिए सोमवार प्रदोष व्रत करें।
३. **मंगलवार का प्रदोष व्रत** - बीमारियों से छुटकारा और स्वास्थ्य के लिए मंगलवार प्रदोष व्रत रखें।
४. **बुधवार का प्रदोष व्रत** - सभी इच्छाओं की पूर्ति के लिए बुधवार प्रदोष व्रत करें।
५. **गुरुवार का प्रदोष व्रत** - दुश्मनों के नाश के लिए गुरुवार प्रदोष व्रत रखें।
६. **शुक्रवार का प्रदोष व्रत** - सौभाग्य और स्त्री की समृद्धि के लिए शुक्रवार प्रदोष व्रत करें।
७. **शनिवार का प्रदोष व्रत** - खोया राज्य और पद पाने के लिए शनिवार प्रदोष व्रत रखें।
**व्रत से क्या लाभ होता है:**
प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति को ये लाभ मिलते हैं:
• सभी पापों से मुक्ति मिलती है
• धन-दौलत की प्राप्ति होती है
• संतान का सुख मिलता है
• अच्छा स्वास्थ्य मिलता है
• दुश्मनों पर विजय मिलती है
• मनोकामनाएं पूरी होती हैं
• जेल से छुटकारा मिलता है
• सुहाग स्थिर रहता है
• राज्य और पद की प्राप्ति होती है
**जरूरी बातें:**
- व्रत के दिन कुछ नहीं खाएं
- प्रदोष काल में पूजा जरूर करें
- सफेद कपड़े पहनें
- बेल पत्र जरूर चढ़ाएं
- ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें
- ब्राह्मणों को खाना और दक्षिणा दें
- कथा जरूर सुनें