गजबदन विनायक आरती - हाथी मुख वाले देवता

गजबदन विनायक गणेश जी का एक नाम है। गजबदन का अर्थ है हाथी के समान मुख वाला। गणेश जी प्रथम पूज्य देवता हैं। गजबदन आरती गणेश भक्ति की अद्भुत रचना है। गणेश जी बुद्धि और सिद्धि दाता हैं। आरती से बुद्धि का विकास होता है। गणेश की कृपा से शिक्षा में सफलता मिलती है।

आरती गजबदन विनायक की (Aarti of Gajabadan Vinayak)

Aarti Ganesh Ji Gods Aarti
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परिचय

गजबदन विनायक की आरती श्री गणेश (विनायक) को समर्पित एक भक्तिपूर्ण स्तुति है। यह आरती विघ्ननाशक, बुद्धिदाता और शुभफलप्रदाता स्वरूप का गुणगान करती है; श्रद्धा से पाठ करने पर आरंभिक कार्य सफल होते हैं, बाधाएँ घटती हैं और मनोबल व समृद्धि बढ़ती है। गणपति/गणेश चतुर्थी, मंदिर‑आरती अथवा घर‑पाठ में इसे गाकर आशीर्वाद की प्रार्थना की जाती है।

आरती गजबदन विनायक की (Aarti of Gajabadan Vinayak)

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॥ आरती — गजबदन विनायक की ॥
आरती गजबदन विनायक की।
सुर‑मुनि‑पूजित गणनायक की॥
आरती गजबदन विनायक की।
सुर‑मुनि‑पूजित गणनायक की॥

एकदन्त, शशिभाल गजानन — विघ्नविनाशक, शुभगुण कानन।
शिवसुत वन्द्यमान चतुरानन — दुःखविनाशक, सुखदायक की॥
आरती गजबदन विनायक की।
सुर‑मुनि‑पूजित गणनायक की॥

ऋद्धि‑सिद्धि‑स्वामी, समर्थ अति — विमल बुद्धि दाता, सुविमल मति।
अघवन दहन, अमल अबिगत गति — विद्या‑विनय‑विभव दायक की॥
आरती गजबदन विनायक की।
सुर‑मुनि‑पूजित गणनायक की॥

पिङ्गल‑नयन, विशाल शुण्डधर — धूम्रवर्ण, शुचि वज्रांकुश‑कर।
लम्बोदर, बाधा‑विपत्ति‑हर — सुर‑वन्दित, सब विधि लायक की॥
आरती गजबदन विनायक की।
सुर‑मुनि‑पूजित गणनायक की॥