मानसा माता आरती | Mansa Mata / Mansa Devi Aarti
॥ आरती — मानसा माता ॥ जय मानसा माता, करुणा की मूरत प्यारी। साँप-रक्षक, संकट हरने वाली, हो जीवन में उजियारी। ॥जय माता॥ तेरी असीम दया स...
पढ़ें →रामचंद्र जी मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाते हैं। राम विष्णु के सातवें अवतार हैं। राम नवमी पर उनका जन्मोत्सव मनाया जाता है। रामचंद्र आरती अत्यंत भक्तिमय है। राम का जीवन आदर्श का प्रतीक है। आरती से धर्म और सत्य की प्रेरणा मिलती है। राम की कृपा से जीवन में मर्यादा और सम्मान आता है।
॥ आरती — श्री रामचन्द्रजी ॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्।
नव कञ्ज‑लोचन, कञ्जमुख कर, कञ्ज पद कंजारुणम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन — हरण भवभय दारुणम्॥
कन्दर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरम्।
पट पीत मानहुं तड़ित रूचि — सुचित नौमि जनक सुतावरम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन — हरण भवभय दारुणम्॥
भजु दीनबंधु, दिनेशदानव, दैत्य वंश निकन्दनम्।
रघुनन्द आनन्दकन्द, कौशलचन्द्र दशरथ नन्दनम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन — हरण भवभय दारुणम्॥
सिर मुकुट, कुंडल, तिलकचारु — उदारु अङ्ग विभूषणम्।
आजानुभुज, शर‑चापधर — संग्राम जित खरदूषणम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन — हरण भवभय दारुणम्॥
इति वदति तुलसीदास — शंकर, शेष, मुनि मन रंजनम्।
मम हृदय कंज निवास कुरु — कामादि खल दल गंजनम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन — हरण भवभय दारुणम्॥
मन जाहि राचेऊ मिलहि सो — वर सहज सुन्दर सांवरो।
करुणा‑निधान, सुजानशील — सनेह जानत रावरो॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन — हरण भवभय दारुणम्॥
एहि भाँति गौरी आसीस सुनि — सिया हित हिय हरषित अली।
तुलसीभावनहि पूजी पुनि‑पुनि — मुदित मन मन्दिर चली॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन — हरण भवभय दारुणम्॥