मानसा माता आरती | Mansa Mata / Mansa Devi Aarti
॥ आरती — मानसा माता ॥ जय मानसा माता, करुणा की मूरत प्यारी। साँप-रक्षक, संकट हरने वाली, हो जीवन में उजियारी। ॥जय माता॥ तेरी असीम दया स...
पढ़ें →गणपति सेवा आरती गणेश जी की विशेष पूजा है। गणेश जी विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता हैं। गणेश चतुर्थी पर इस आरती का विशेष महत्व है। गणपति सेवा आरती महाराष्ट्र में प्रसिद्ध है। मोदक और दूर्वा का भोग लगाया जाता है। आरती से सभी विघ्न दूर होते हैं। गणेश की कृपा से सभी कार्यों में सफलता मिलती है।
॥ आरती — गणपति की सेवा ॥
गणपति की सेवा, मंगल मेवा; सेवा से सब विघ्न टरैं।
तीन लोक के सकल देवता, द्वार खड़े नित अर्ज करैं॥
गणपति की सेवा, मंगल मेवा॥
ऋद्धि‑सिद्धि दक्षिण‑वाम विराजें, आनन्द से चमर करैं।
धूप‑दीप लिये आरती, भक्त खड़े जयकार करैं॥
गणपति की सेवा, मंगल मेवा॥
गुड़ के मोदक भोग लगे, मूषक वाहन चढ़्या सिरै।
सौम्य रूप देख गणपति का, विघ्न सब भागें दूर करै॥
गणपति की सेवा, मंगल मेवा॥
भादो मास और शुक्ल चतुर्थी, दुपारा पर्व सपरै।
लियो जन्म गणपति प्रभु ने, मन में आनंद भरै॥
गणपति की सेवा, मंगल मेवा॥
अद्भुत बाजे बाजा सब ओर, इन्द्र‑कादेव बन्धु गान करैं।
श्री शंकर के आनन्द उपजे, नाम सुनि सब विघ्न टरैं॥
गणपति की सेवा, मंगल मेवा॥
आनि विधाता बैठे आसन, इन्द्र‑अप्सरा नृत्य करैं।
देख वेद ब्रह्मा जी, जाको विघ्न‑विनाशक नाम धरैं॥
गणपति की सेवा, मंगल मेवा॥
एकदन्त गजवदन विनायक, त्रिनयन रूप अनूप धरैं।
पगथंभा सा उदर पुष्ट है, देव चंद्रमा हंसि करैं॥
गणपति की सेवा, मंगल मेवा॥
चौदह लोक विचरै प्रभु, तीनों लोक में जिनका राज।
देह‑मन‑धन सब अर्पित करै, कृपा करै हर भारह्राज॥
गणपति की सेवा, मंगल मेवा॥
उठि प्रभात जप ध्यान करैं, ताहि के कारज सर्व सफल हों।
पूजा‑काल आरती गावत भक्त, शिर पर यश‑छत्र फल पावैं॥
गणपति की सेवा, मंगल मेवा॥
गणपति की पूजा पहले करै, सब काम निर्विघ्न सिद्ध होय।
सभी भक्त गणपति के हाथ जोड़कर, प्रार्थना मन से करैं॥
गणपति की सेवा, मंगल मेवा॥