मानसा माता आरती | Mansa Mata / Mansa Devi Aarti
॥ आरती — मानसा माता ॥ जय मानसा माता, करुणा की मूरत प्यारी। साँप-रक्षक, संकट हरने वाली, हो जीवन में उजियारी। ॥जय माता॥ तेरी असीम दया स...
पढ़ें →गोवर्धन पर्वत कृष्ण ने इंद्र से रक्षा के लिए उठाया था। अन्नकूट पर गोवर्धन पूजा होती है। गोवर्धन परिक्रमा अत्यंत पुण्यदायी है। गोवर्धन आरती कृष्ण भक्ति का प्रतीक है। ब्रज में यह परंपरा बहुत पुरानी है। आरती से समृद्धि और अन्न की प्राप्ति होती है। गोवर्धन की कृपा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
॥ आरती — श्री गोवर्धन महाराज की ॥
श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज — तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
तोपे पान चढ़े, तोपे फूल चढ़े — तोपे चढ़े दूध की धार।
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
तेरी सात कोस की परिकम्मा — चकलेश्वर है विश्राम।
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
तेरे गले में कण्ठ साज रहेओ — ठोड़ी पे हीरा लाल।
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
तेरे कानन कुण्डल चमक रहेओ — तेरी झाँकी बनी विशाल।
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
गिरिराज धरण प्रभु, तेरी शरण — करो भक्त का बेड़ा पार।
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।