मनिहारी का भेष बनाया (श्याम चूड़ी बेचने आया)
🎵 श्याम चूड़ी बेचने आया (पूर्ण भजन लिरिक्स) मनिहारी का भेष बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया। मनिहारी का भेष बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥ छ...
पढ़ें →हेलो यानी स्वागत का लोकगीत है। कल्लाजी का स्वागत करने का गीत है। राजस्थानी परंपरा का विशेष गीत है। भक्तिभाव से परिपूर्ण रचना है। मेलों और त्योहारों में गाया जाता है। गीत से उत्साह और खुशी मिलती है।
॥ जय माँ नागणेचा ॥ ॥ श्री ॥ ॥ जय श्री कल्ला बावजी ॥
जय श्री कल्याण कँवर जी
कँवरा धूप के धुंआड़े बेगा आवजो
जरणी जगदम्बा री जागे जागे रात
आज रे सोना री सूरज उगीयो ॥
कँवरा जाजम डारी दे चन्दन चौक में,
ऊंची छतरिया रा फड़के निशान || आज रे ॥
भोपा देवल ने किया जी नौ दन नोरेता,
जठे नारेला रो होवे-होवे होम | आज रे ॥
कुँवरा अंतरिया रमों ने अंग मायेने,
थे तो पेरोनी फूलाँ रा गेंदा हार || आज रे ॥
कँवरा केसर कसूम्मू आमल्याँ गारेमा,
केसर दूध रो कठोरो लो कल्याण ॥ आज रे ॥
कँवरा नोबत नगाड़ा देवल बाजिया ।
शूर शरमां बाजे रे जंगी ढ़ोल ॥ आज रे ॥
कँवरा गुरजारी धमरौलॉ देव मंदिर में ॥
वा तो रूनेड़ा में बाजे घूंघर माल ॥ आज रे ॥
कँवरा मावड़ रा उड़े जी नेंजा अंबरा में।
भैरव काला गौरा आगे पाछे लाग । आज रे ॥
सोना रो सूरज उगीया । आज रे ॥