शुक्रवार प्रदोष कथा – भाग्य और धन दौलत बढ़ाने का व्रत

शुक्रवार प्रदोष व्रत की यह पवित्र कथा भाग्य बढ़ाने और महिलाओं की खुशहाली के लिए बेहद फायदेमंद है। जब त्रयोदशी के दिन शुक्रवार पड़ता है, तब भगवान शिव की पूजा करने से पति-पत्नी के जीवन में सुख-शांति आती है। इस कथा में एक सेठ के बेटे की कहानी है जिसने शुक्रास्त में बीवी को ससुराल से ले आया और बहुत परेशानियां झेलीं। बाद में सही समय पर वापस जाने से सभी मुसीबतें खत्म हो गईं। जो भी शुक्र प्रदोष व्रत करता है, उसका जीवन खुशहाल होता है और भाग्य बढ़ता है।

शुक्रवार प्रदोष कथा | शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व

Vrat Katha धार्मिक कथाएँ (Religious Stories) पूजा विधि (Puja Vidhi) प्रदोष व्रत व्रत एवं उपवास (Fasting & Vrat)
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परिचय

शुक्रवार प्रदोष व्रत की यह पावन कथा भाग्य, धन-दौलत और पति-पत्नी के सुख की प्राप्ति का रास्ता है। जब त्रयोदशी तिथि पर शुक्रवार आता है, उस दिन भगवान शिव की आराधना से विशेष फल मिलता है। इस व्रत में सफेद रंग और खीर जैसी चीजों का महत्व है। जो भी व्यक्ति विधि से यह व्रत करता है, उसके जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

This sacred Friday Pradosh Vrat Katha is the path to prosperity, wealth, and marital happiness. When Friday comes on Trayodashi tithi, worshipping Lord Shiva brings special benefits. White color and items like kheer have importance in this fast. Whoever observes this fast properly, happiness and prosperity come in their life.

शुक्रवार प्रदोष कथा | शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व

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🙏 शुक्रवार प्रदोष व्रत कथा 🙏

सूत जी बोले - "प्राचीन काल की बात है। एक नगर में तीन मित्र रहते थे - एक राजकुमार पुत्र, दूसरा ब्राह्मण पुत्र, तीसरा सेठ पुत्र।"

"एक दिन तीनों मित्र स्त्रियों की चर्चा कर रहे थे। ब्राह्मण पुत्र ने कहा - 'नारीहीन घर भूतों का डेरा होता है।' सेठ पुत्र ने यह सुनकर अपनी पत्नी लाने का निश्चय किया।"

"सेठ पुत्र ने माता-पिता से अपना निश्चय बताया। उन्होंने कहा कि शुक्र देवता डूबे हुए हैं, इन दिनों बहु-बेटियों को विदा कराना शुभ नहीं। शुक्रोदय के बाद पत्नी को विदा कराना।"

"सेठ पुत्र अपनी जिद से टस से मस नहीं हुआ और ससुराल पहुंच गया। सास-ससुर को समझाने की कोशिश की किंतु वह नहीं माना। विवश होकर उन्हें कन्या विदा करनी पड़ी।"

"ससुराल से विदा होकर पति-पत्नी नगर से बाहर निकले ही थे कि बैलगाड़ी का पहिया टूट गया और एक बैल की टांग टूट गई। पत्नी को भी चोट आई।"

"आगे चलने पर डाकुओं से भेंट हो गई और वे धन-धान्य लूटकर ले गए। सेठ पुत्र रोता-पीटता अपने घर पहुंचा। पहुंचते ही सांप ने डस लिया। वैद्यों ने कहा कि तीन दिन में मर जाएगा।"

"ब्राह्मण पुत्र को इस घटना का पता लगा। उसने सेठ से कहा - 'आप अपने लड़के को पत्नी सहित बहू के घर वापस भेज दो। यह बाधाएं इसलिए आईं कि आपका पुत्र शुक्रास्त में पत्नी को विदा करा लाया। यदि यह वहां पहुंच जाएगा तो बच जाएगा।'"

"सेठ को बात समझ आई। उसने पुत्र-वधू को वापस भेज दिया। वहां पहुंचते ही सेठ पुत्र की हालत ठीक होने लगी। तत्पश्चात उन्होंने शेष जीवन सुख-आनंदपूर्वक व्यतीत किया।"

🙏 ॐ नमः शिवाय 🙏

 

📌 PUJA VIDHI :
- सोमवार प्रदोष जैसी पूजा करें
- सफेद रंग का महत्व है
- खीर का प्रसाद चढ़ाएं

📌 व्रत के लाभ :
- भाग्य बढ़ता है
- पति-पत्नी में सुख रहता है
- धन-दौलत आती है

 

📌 प्रदोष व्रत का परिचय

**प्रदोष क्या है:**

प्रदोष का तात्पर्य उस समय से है जब सूर्य अस्त हो जाता है और रात्रि का आगमन होने वाला होता है। यह संध्या और रात्रि के मध्य का काल होता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार यह समय भगवान शिव की उपासना के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इस काल में महादेव की आराधना करने से असाधारण फल प्राप्त होता है।

**व्रत कैसे करें:**

त्रयोदशी की तिथि पर व्रत रखने वाले को पूरे दिन कुछ भी नहीं खाना चाहिए। शाम के समय जब सूरज डूबने में तीन घड़ी बची हो, तब स्नान करके साफ सफेद कपड़े पहन लें। इसके बाद संध्या वंदन करके भगवान शिव की पूजा शुरू करें।

पूजा करने की जगह को पानी से साफ करके वहां मंडप बना लें। पांच रंगों के फूलों से कमल का आकार बनाएं और कुश का आसन बिछा दें। आसन पर पूर्व दिशा में मुंह करके बैठें। फिर भगवान महादेव का ध्यान करें।

**भगवान शिव का ध्यान:**

करोड़ों चांदों जैसी चमक वाले, तीन आंखों वाले, सिर पर चांद धारण करने वाले, भूरे रंग की जटाएं रखने वाले, नीले गले वाले, अनेक रुद्राक्ष की मालाओं से सजे हुए, आशीर्वाद देने वाले हाथ वाले, त्रिशूल धारण करने वाले, नागों के कुंडल पहने हुए, बाघ की खाल ओढ़े हुए, रत्नों से जड़े सिंहासन पर बैठे भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए।

**व्रत का समापन कैसे करें:**

सुबह नहा-धोकर रंग-बिरंगे कपड़ों से मंडप सजाएं। उस मंडप में शिव-पार्वती की मूर्ति रखकर विधि से पूजा करें। फिर शिव-पार्वती के लिए खीर से हवन करना चाहिए।

हवन करते समय 'ॐ उमा सहित शिवाय नमः' मंत्र बोलकर १०८ बार आहुति डालें। इसी तरह 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र से भगवान शंकर के लिए आहुति दें। हवन पूरा होने पर किसी धार्मिक व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार दान दें।

इसके बाद ब्राह्मणों को खाना खिलाएं और दक्षिणा दें। ब्राह्मणों से कहलवाएं कि व्रत पूरा हुआ। ब्राह्मणों की आज्ञा लेकर अपने परिवार वालों के साथ भगवान शंकर को याद करते हुए भोजन करें।

इस तरह व्रत का समापन करने से व्रत रखने वाले को पुत्र-पौत्र की प्राप्ति होती है और स्वास्थ्य अच्छा रहता है। साथ ही दुश्मनों पर जीत मिलती है और सभी पापों से छुटकारा मिलता है। यह स्कंद पुराण में लिखा गया है।

**त्रयोदशी व्रत क्यों महत्वपूर्ण है:**

त्रयोदशी यानी प्रदोष व्रत करने वाला व्यक्ति हमेशा खुश रहता है। इस व्रत के प्रभाव से सभी पापों का नाश हो जाता है। यह व्रत करने से विधवा स्त्रियों को अधर्म से घृणा होती है और सुहागन स्त्रियों का सुहाग स्थिर रहता है। कैदी को जेल से मुक्ति मिलती है।

जो स्त्री-पुरुष जिस इच्छा से यह व्रत रखते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं कैलाश के स्वामी भगवान शंकर पूरी करते हैं। सूत जी बताते हैं कि त्रयोदशी व्रत करने वाले को सौ गायों के दान जितना पुण्य मिलता है।

इस व्रत को जो सही तरीके से और पूरे मन से करता है, उसके सभी दुख दूर हो जाते हैं। सभी महिलाओं को ग्यारह त्रयोदशी या पूरे साल की २६ त्रयोदशी पूरी करने के बाद उद्यापन करना चाहिए।

**प्रदोष व्रत में दिनों का महत्व:**

त्रयोदशी तिथि पर जो भी दिन पड़ता है, उसी दिन के हिसाब से व्रत करना चाहिए और उसी दिन की कथा पढ़नी या सुननी चाहिए। खासतौर पर रविवार, सोमवार और शनिवार के प्रदोष व्रत जरूर करने चाहिए। इन सभी से मनचाहा फल मिलता है।

**अलग-अलग दिनों के प्रदोष व्रत:**

१. **रविवार का प्रदोष व्रत** - लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रविवार प्रदोष व्रत रखें।

२. **सोमवार का प्रदोष व्रत** - ग्रहों की खराब दशा दूर करने के लिए सोमवार प्रदोष व्रत करें।

३. **मंगलवार का प्रदोष व्रत** - बीमारियों से छुटकारा और स्वास्थ्य के लिए मंगलवार प्रदोष व्रत रखें।

४. **बुधवार का प्रदोष व्रत** - सभी इच्छाओं की पूर्ति के लिए बुधवार प्रदोष व्रत करें।

५. **गुरुवार का प्रदोष व्रत** - दुश्मनों के नाश के लिए गुरुवार प्रदोष व्रत रखें।

६. **शुक्रवार का प्रदोष व्रत** - सौभाग्य और स्त्री की समृद्धि के लिए शुक्रवार प्रदोष व्रत करें।

७. **शनिवार का प्रदोष व्रत** - खोया राज्य और पद पाने के लिए शनिवार प्रदोष व्रत रखें।

**व्रत से क्या लाभ होता है:**

प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति को ये लाभ मिलते हैं:

• सभी पापों से मुक्ति मिलती है
• धन-दौलत की प्राप्ति होती है
• संतान का सुख मिलता है
• अच्छा स्वास्थ्य मिलता है
• दुश्मनों पर विजय मिलती है
• मनोकामनाएं पूरी होती हैं
• जेल से छुटकारा मिलता है
• सुहाग स्थिर रहता है
• राज्य और पद की प्राप्ति होती है

**जरूरी बातें:**

- व्रत के दिन कुछ नहीं खाएं
- प्रदोष काल में पूजा जरूर करें
- सफेद कपड़े पहनें
- बेल पत्र जरूर चढ़ाएं
- ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें
- ब्राह्मणों को खाना और दक्षिणा दें
- कथा जरूर सुनें