महाशिवरात्रि व्रत कथा | शिव पार्वती विवाह और पूजा विधि
🙏 महाशिवरात्रि व्रत कथा 🙏 **महाशिवरात्रि का महत्व:** महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का सर्वाधिक पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है। यह व्रत फाल...
पढ़ें →बृहस्पतिवार व्रत की यह प्रेरक कथा एक गरीब ब्राह्मण परिवार की है। ब्राह्मण की पुत्री बचपन से ही भगवान विष्णु की परम भक्त थी और नियमित रूप से गुरुवार का व्रत रखती थी। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर गुरु बृहस्पतिदेव ने उसे ऐसा वरदान दिया कि उसके जौ के दाने सोने में बदल जाते थे। अंत में उसका विवाह राजकुमार से हुआ और उसके माता-पिता भी धनी हो गए। यह कथा दर्शाती है कि निष्ठापूर्वक व्रत करने और भगवान में विश्वास रखने से जीवन में चमत्कार होते हैं और सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
🙏 गुरुवार व्रत कथा - ब्राह्मण कन्या की कहानी 🙏
**कथा की शुरुआत:**
बहुत पुराने समय की बात है। एक अत्यंत निर्धन ब्राह्मण रहते थे। उनकी कोई संतान नहीं थी। वे प्रतिदिन पूजा-पाठ करते थे, लेकिन उनकी पत्नी अस्वच्छता में रहती थी। वह न स्नान करती, न पूजा करती। सुबह उठते ही पहले भोजन करती, फिर अन्य काम करती। ब्राह्मण बहुत दुखी रहते थे। पत्नी को समझाते परंतु कोई लाभ नहीं होता।
भगवान की कृपा से एक समय ब्राह्मण की पत्नी गर्भवती हुई। दसवें माह एक सुंदर कन्या का जन्म हुआ। निर्धन ब्राह्मण कन्या के जन्म से चिंतित हो गए।
कन्या धीरे-धीरे बड़ी होने लगी। बचपन से ही उसकी रुचि भगवान विष्णु की आराधना में थी। वह प्रातः उठकर स्नान करके मंदिर जाती और भगवान विष्णु की पूजा करती। गुरुवार को व्रत रखकर विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करती। पूजा के पश्चात पाठशाला जाती।
**अद्भुत घटना:**
घर से निकलते समय वह मुट्ठी भर जौ लेकर चलती और पाठशाला के मार्ग में धीरे-धीरे जौ बिखेरती जाती। जब वह पाठशाला से घर लौटती तो वे जौ के दाने स्वर्ण में परिवर्तित हो जाते। कन्या सभी स्वर्ण के दाने एकत्र कर लाती।
एक दिन जब वह स्वर्ण के दानों को साफ कर रही थी तो उसकी माता ने कहा - "बेटी! स्वर्ण के दाने साफ करने के लिए स्वर्ण का सूप होना चाहिए।"
अगला दिन गुरुवार था। उसने भगवान बृहस्पति की पूजा करते हुए निवेदन किया - "हे प्रभु! यदि मैंने आपका व्रत सही तरीके से किया हो तो मुझे स्वर्ण का सूप प्रदान करें।"
भगवान बृहस्पतिदेव ने उसकी प्रार्थना स्वीकार करने का वचन दिया। पाठशाला से लौटते समय उसे मार्ग में स्वर्ण का सूप मिल गया। घर आकर स्वर्ण का सूप माता को दिखाया और स्वर्ण के दाने साफ करने लगी।
**राजकुमार से मुलाकात:**
उसी क्षण नगर का राजकुमार वहां से गुजर रहा था। उस सुंदर कन्या को स्वर्ण के सूप में जौ साफ करते देखकर राजकुमार उस पर मोहित हो गया।
महल लौटकर राजकुमार ने राजा से उस कन्या से विवाह की इच्छा व्यक्त की। राजा ने ब्राह्मण को बुलाकर विवाह का प्रस्ताव रखा। ब्राह्मण सहमत हो गए। भव्य समारोह में कन्या का विवाह राजकुमार से संपन्न हुआ।
वधू बनकर ब्राह्मण की कन्या राजमहल में चली गई। कन्या के जाने से ब्राह्मण पुनः निर्धन हो गए। कई दिनों तक भोजन भी नहीं मिलता था।
**ब्राह्मण का संकट:**
अत्यंत दुखी होकर ब्राह्मण एक दिन अपनी कन्या के पास गए। पिता की दुर्दशा देखकर कन्या ने उन्हें बहुत धन दिया।
उस धन से कुछ समय तो आराम से बीता। परंतु शीघ्र ही फिर वही स्थिति हो गई। ब्राह्मण पुनः कन्या से धन लेने महल पहुंचे।
कन्या ने पिता की स्थिति देखकर कहा - "पिताजी! आप कब तक मुझसे धन लेकर जीवन चलाएंगे। आप कोई ऐसा उपाय क्यों नहीं करते जिससे आपका घर धन से भर जाए।"
ब्राह्मण बोले - "मैंने तेरी माता को बहुत समझाया, परंतु उसकी समझ में कुछ नहीं आता। उसकी गंदगी समाप्त हो तो घर की गरीबी भी दूर हो सकती है।"
कुछ विचार करके कन्या ने कहा - "पिताजी! आप कुछ समय के लिए माता को मेरे पास छोड़ जाइए।"
ब्राह्मण अपनी पत्नी को कन्या के पास महल में छोड़ गए।
**माता में परिवर्तन:**
कन्या ने अपनी माता से कहा - "माता जी, आप कल सुबह उठकर स्नान करके भगवान बृहस्पतिदेव (विष्णुजी) की पूजा अवश्य करें। पूजा से आपकी निर्धनता दूर हो जाएगी।"
परंतु माता ने उसकी बात नहीं मानी। तब क्रोधित होकर कन्या ने माता को एक कमरे में बंद कर दिया।
सूर्योदय पर माता को उठाकर, बलपूर्वक स्नान कराया और मंदिर ले जाकर भगवान बृहस्पतिदेव की पूजा कराई।
कुछ दिनों तक यह क्रम चलने से माता की बुद्धि बदल गई और वह स्वयं गुरुवार का व्रत करने लगी। व्रत करने से ब्राह्मण के घर में भगवान विष्णु की कृपा से धन आने लगा।
**सुखद समापन:**
दोनों दंपति धन-संपत्ति पाकर प्रसन्नतापूर्वक जीवन बिताते हुए विष्णुधाम को प्राप्त हुए।
**शिक्षा:**
इस कथा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि गुरुवार का व्रत करने से भगवान बृहस्पति की कृपा मिलती है। जो भी भक्ति और श्रद्धा से व्रत करता है, उसके जीवन में धन, समृद्धि, सुख और सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है।
जो लोग विधिपूर्वक गुरुवार का व्रत करते हैं और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं, भगवान उनकी सभी कामनाएं पूर्ण करते हैं।
🙏 जय गुरु बृहस्पति देव 🙏
॥ इति श्री गुरुवार व्रत कथा समाप्त ॥
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📌 PUJA VIDHI (पूजा विधि):
**गुरुवार व्रत कैसे करें:**
1. **समय:** गुरुवार को सूर्योदय से पूर्व जागें।
2. **स्नान:** स्नान अवश्य करें परंतु उस दिन केश नहीं धोने चाहिए।
3. **पूजा सामग्री:** चने की दाल, गुड़, केला, पीले पुष्प, हल्दी, पीला कपड़ा, दीपक, धूप, अगरबत्ती।
4. **पूजन विधि:**
- केले के पौधे की जड़ में भगवान विष्णु की प्रतिमा रखें
- चने की दाल और गुड़ से पूजा करें
- पीले फूल अर्पित करें
- दीपक और धूप प्रज्वलित करें
- गुरुवार की कथा पढ़ें या सुनें
5. **आहार:** दिन में केवल एक बार भोजन ग्रहण करें। भोजन में पीले खाद्य पदार्थ जैसे चने की दाल, बेसन, हल्दी युक्त सब्जी आदि लें।
6. **दान:** ब्राह्मणों को पीले कपड़े, चने की दाल, गुड़, केला आदि दान करें।
7. **कथा:** गुरुवार की कथा अवश्य सुनें या पढ़ें।
**व्रत के फायदे:**
- धन में वृद्धि
- संतान प्राप्ति
- इच्छाओं की पूर्ति
- सभी परेशानियों से मुक्ति
- जीवन में शांति और खुशहाली
**ध्यान रखने योग्य बातें:**
- गुरुवार को सिर नहीं धोना चाहिए
- पीले रंग का विशेष महत्व है
- केले के पौधे की पूजा अवश्य करें
- कथा सुनना या पढ़ना आवश्यक है
- श्रद्धा और विश्वास से व्रत करें