महाशिवरात्रि व्रत कथा | शिव पार्वती विवाह और पूजा विधि
🙏 महाशिवरात्रि व्रत कथा 🙏 **महाशिवरात्रि का महत्व:** महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का सर्वाधिक पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है। यह व्रत फाल...
पढ़ें →बुधवार प्रदोष व्रत की यह पवित्र कथा सभी इच्छाओं की पूर्ति के लिए बेहद ताकतवर है। जब त्रयोदशी के दिन बुधवार पड़ता है, तब भगवान शंकर की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस कथा में एक आदमी की कहानी है जिसने बुधवार को अपनी पत्नी को ससुराल से ले आया। भगवान की माया से उसे बहुत परेशानियां हुईं। बाद में भगवान शंकर से प्रार्थना करने पर सभी मुसीबतें दूर हो गईं। जो भी बुध प्रदोष व्रत करता है, उसकी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।
🙏 बुधवार प्रदोष व्रत कथा 🙏
सूत जी बोले - "अब मैं बुध त्रयोदशी प्रदोष की कथा सुनाता हूं।"
**व्रत विधि:**
"इस व्रत में दिन में केवल एक बार भोजन करना चाहिए। हरी वस्तुओं का प्रयोग करना जरूरी है। यह व्रत भगवान शंकर का प्रिय व्रत है। शंकर जी की पूजा धूप, बेल पत्र से करनी चाहिए।"
**कथा:**
"प्राचीन काल की कथा है। एक पुरुष का नया-नया विवाह हुआ था। वह गौने के बाद दूसरी बार पत्नी को लेने अपनी ससुराल पहुंचा। उसने सास से कहा कि बुधवार के दिन ही पत्नी को लेकर अपने नगर जाएगा।"
"सास-ससुर और साले-सालियों ने समझाया कि बुधवार को पत्नी को विदा कराना शुभ नहीं है, लेकिन वह अपनी जिद से टस से मस नहीं हुआ। विवश होकर सास-ससुर को भारी मन से विदा करना पड़ा।"
"पति-पत्नी बैलगाड़ी में चल रहे थे। एक नगर के बाहर निकलते ही पत्नी को प्यास लगी। पति लोटा लेकर पानी लेने गया। जब वह पानी लेकर लौटा तो उसके क्रोध की सीमा न रही।"
"उसकी पत्नी किसी अन्य पुरुष के लाए लोटे में से पानी पी रही थी और हंस-हंसकर बात कर रही थी। क्रोध में आग-बबूला होकर वह उस आदमी से झगड़ा करने लगा। यह देखकर आश्चर्य हुआ कि उस पुरुष की शक्ल उससे हूबहू मिलती थी।"
"हमशक्ल आदमियों को झगड़ते देख वहां भीड़ इकट्ठी हो गई। सिपाही भी आ गया। सिपाही ने स्त्री से पूछा कि इन दोनों में से कौन तेरा पति है? वह बेचारी असमंजस में पड़ गई क्योंकि दोनों की शक्ल बिल्कुल मिलती थी।"
"बीच राह में अपनी पत्नी को इस तरह खोया देखकर उस पुरुष की आंख भर आई। वह भगवान शंकर से प्रार्थना करने लगा - 'हे भगवान! आप मेरी और मेरी पत्नी की रक्षा करो। मुझसे बड़ी भूल हुई जो मैं बुधवार को पत्नी को विदा करा लाया। भविष्य में ऐसा अपराध कदापि नहीं करूंगा।'"
"उसकी प्रार्थना पूरी होते ही दूसरा पुरुष अंतर्धान हो गया और वह पुरुष सकुशल अपनी पत्नी के साथ घर पहुंच गया। उस दिन के बाद पति-पत्नी नियमपूर्वक बुधवार प्रदोष व्रत रखने लगे।"
🙏 ॐ नमः शिवाय 🙏
📌 PUJA VIDHI:
- एक बार खाना खाएं
- हरी चीजों का इस्तेमाल करें
- शंकर जी पूजा करें
- धूप, बेल पत्र चढ़ाएं
📌 व्रत के लाभ :
- सभी इच्छाएं पूरी होती हैं
- परिवार में सुख मिलता है
- परेशानियां खत्म होती हैं
📌 प्रदोष व्रत का परिचय
**प्रदोष क्या है:**
प्रदोष का तात्पर्य उस समय से है जब सूर्य अस्त हो जाता है और रात्रि का आगमन होने वाला होता है। यह संध्या और रात्रि के मध्य का काल होता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार यह समय भगवान शिव की उपासना के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इस काल में महादेव की आराधना करने से असाधारण फल प्राप्त होता है।
**व्रत कैसे करें:**
त्रयोदशी की तिथि पर व्रत रखने वाले को पूरे दिन कुछ भी नहीं खाना चाहिए। शाम के समय जब सूरज डूबने में तीन घड़ी बची हो, तब स्नान करके साफ सफेद कपड़े पहन लें। इसके बाद संध्या वंदन करके भगवान शिव की पूजा शुरू करें।
पूजा करने की जगह को पानी से साफ करके वहां मंडप बना लें। पांच रंगों के फूलों से कमल का आकार बनाएं और कुश का आसन बिछा दें। आसन पर पूर्व दिशा में मुंह करके बैठें। फिर भगवान महादेव का ध्यान करें।
**भगवान शिव का ध्यान:**
करोड़ों चांदों जैसी चमक वाले, तीन आंखों वाले, सिर पर चांद धारण करने वाले, भूरे रंग की जटाएं रखने वाले, नीले गले वाले, अनेक रुद्राक्ष की मालाओं से सजे हुए, आशीर्वाद देने वाले हाथ वाले, त्रिशूल धारण करने वाले, नागों के कुंडल पहने हुए, बाघ की खाल ओढ़े हुए, रत्नों से जड़े सिंहासन पर बैठे भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए।
**व्रत का समापन कैसे करें:**
सुबह नहा-धोकर रंग-बिरंगे कपड़ों से मंडप सजाएं। उस मंडप में शिव-पार्वती की मूर्ति रखकर विधि से पूजा करें। फिर शिव-पार्वती के लिए खीर से हवन करना चाहिए।
हवन करते समय 'ॐ उमा सहित शिवाय नमः' मंत्र बोलकर १०८ बार आहुति डालें। इसी तरह 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र से भगवान शंकर के लिए आहुति दें। हवन पूरा होने पर किसी धार्मिक व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार दान दें।
इसके बाद ब्राह्मणों को खाना खिलाएं और दक्षिणा दें। ब्राह्मणों से कहलवाएं कि व्रत पूरा हुआ। ब्राह्मणों की आज्ञा लेकर अपने परिवार वालों के साथ भगवान शंकर को याद करते हुए भोजन करें।
इस तरह व्रत का समापन करने से व्रत रखने वाले को पुत्र-पौत्र की प्राप्ति होती है और स्वास्थ्य अच्छा रहता है। साथ ही दुश्मनों पर जीत मिलती है और सभी पापों से छुटकारा मिलता है। यह स्कंद पुराण में लिखा गया है।
**त्रयोदशी व्रत क्यों महत्वपूर्ण है:**
त्रयोदशी यानी प्रदोष व्रत करने वाला व्यक्ति हमेशा खुश रहता है। इस व्रत के प्रभाव से सभी पापों का नाश हो जाता है। यह व्रत करने से विधवा स्त्रियों को अधर्म से घृणा होती है और सुहागन स्त्रियों का सुहाग स्थिर रहता है। कैदी को जेल से मुक्ति मिलती है।
जो स्त्री-पुरुष जिस इच्छा से यह व्रत रखते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं कैलाश के स्वामी भगवान शंकर पूरी करते हैं। सूत जी बताते हैं कि त्रयोदशी व्रत करने वाले को सौ गायों के दान जितना पुण्य मिलता है।
इस व्रत को जो सही तरीके से और पूरे मन से करता है, उसके सभी दुख दूर हो जाते हैं। सभी महिलाओं को ग्यारह त्रयोदशी या पूरे साल की २६ त्रयोदशी पूरी करने के बाद उद्यापन करना चाहिए।
**प्रदोष व्रत में दिनों का महत्व:**
त्रयोदशी तिथि पर जो भी दिन पड़ता है, उसी दिन के हिसाब से व्रत करना चाहिए और उसी दिन की कथा पढ़नी या सुननी चाहिए। खासतौर पर रविवार, सोमवार और शनिवार के प्रदोष व्रत जरूर करने चाहिए। इन सभी से मनचाहा फल मिलता है।
**अलग-अलग दिनों के प्रदोष व्रत:**
१. **रविवार का प्रदोष व्रत** - लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रविवार प्रदोष व्रत रखें।
२. **सोमवार का प्रदोष व्रत** - ग्रहों की खराब दशा दूर करने के लिए सोमवार प्रदोष व्रत करें।
३. **मंगलवार का प्रदोष व्रत** - बीमारियों से छुटकारा और स्वास्थ्य के लिए मंगलवार प्रदोष व्रत रखें।
४. **बुधवार का प्रदोष व्रत** - सभी इच्छाओं की पूर्ति के लिए बुधवार प्रदोष व्रत करें।
५. **गुरुवार का प्रदोष व्रत** - दुश्मनों के नाश के लिए गुरुवार प्रदोष व्रत रखें।
६. **शुक्रवार का प्रदोष व्रत** - सौभाग्य और स्त्री की समृद्धि के लिए शुक्रवार प्रदोष व्रत करें।
७. **शनिवार का प्रदोष व्रत** - खोया राज्य और पद पाने के लिए शनिवार प्रदोष व्रत रखें।
**व्रत से क्या लाभ होता है:**
प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति को ये लाभ मिलते हैं:
• सभी पापों से मुक्ति मिलती है
• धन-दौलत की प्राप्ति होती है
• संतान का सुख मिलता है
• अच्छा स्वास्थ्य मिलता है
• दुश्मनों पर विजय मिलती है
• मनोकामनाएं पूरी होती हैं
• जेल से छुटकारा मिलता है
• सुहाग स्थिर रहता है
• राज्य और पद की प्राप्ति होती है
**जरूरी बातें:**
- व्रत के दिन कुछ नहीं खाएं
- प्रदोष काल में पूजा जरूर करें
- सफेद कपड़े पहनें
- बेल पत्र जरूर चढ़ाएं
- ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें
- ब्राह्मणों को खाना और दक्षिणा दें
- कथा जरूर सुनें