शीतला माता आरती - रोग निवारण की देवी

शीतला माता चेचक और त्वचा रोगों की देवी हैं। शीतला अष्टमी पर उनकी विशेष पूजा होती है। गधे पर सवार देवी झाड़ू और कलश धारण करती हैं। शीतला आरती रोग निवारण के लिए है। ठंडा भोजन प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है। आरती से बच्चों के रोग दूर होते हैं। माता की कृपा से स्वास्थ्य और शीतलता मिलती है।

शीतला माता की आरती (Aarti of Sheetla Mata)

Aarti Goddesses Aarti
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परिचय

शीतला माता की आरती रोगों और महामारी से रक्षा करने वाली मातृशक्ति की स्तुति है। यह आरती श्रद्धा‑भाव से पाठ करने पर शीतलता, स्वास्थ्य और बचपन की बीमारियों — विशेषकर वर्णित पारंपरिक रोगों — से मुक्ति की प्रार्थना व्यक्त करती है। शीतला अष्टमी/व्रत और मंदिर‑पूजा तथा परिवार में बीमार व्यक्तियों के आरोग्य के लिए श्रद्धालु इसका पाठ करते हैं; विश्वास के साथ जपने पर मानसिक शांति और रोगनिवारण की आशा जुटती है।

शीतला माता की आरती (Aarti of Sheetla Mata)

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॥ आरती — श्री शीतला माता (दोहा‑शैली) ॥

जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता।
आदि ज्योति महारानी, सब फल की दाता।
ॐ जय शीतला माता...।

रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भाता।
ऋद्धि‑सिद्धि चँवर डोलावें, जगमग छवि छाता।
ॐ जय शीतला माता...।

विष्णु सेवत ठाढ़े, सेवें शिव धाता।
वेद पुराण वरणत, तपार नहीं पाता।
ॐ जय शीतला माता...।

इन्द्र मृदंग बजावत, चन्द्र वीणा हात।
सूरज ताल बजावै, नारद मुनि गात।
ॐ जय शीतला माता...।

घण्टा शङ्ख शहनाई, बाजै मन भाता।
करै भक्तजन आरती, लखि‑लखि हर्षाता।
ॐ जय शीतला माता...।

ब्रह्म रूप वरदानी, तुही तीन काल ज्ञाता।
भक्तन को सुख देती, मातु‑पिता भ्राता।
ॐ जय शीतला माता...।

जो जन ध्यान लगावे, प्रेम‑शक्ति पाता।
सकल मनोरथ पाए, भवनिधि तर जाता।
ॐ जय शीतला माता...।

रोगों से जो पीड़ित, कोई शरण तेरी आता।
कोढ़ी पावे निर्मल काया, अन्ध नेत्र पाता।
ॐ जय शीतला माता...।

बाँझ पुत्र को पावे, दरिद्र कट जाता।
जोकि न भजै ताको, सिर धुनि पछताता।
ॐ जय शीतला माता...।

शीतल करती जन की, तुही जग का त्राता।
उत्पत्ति बाला बिनाशन, तू सब की माता।
ॐ जय शीतला माता...।

दास नारायण कर जोरी, माता भक्ति दीजै।
भक्ति अपनी दीजै और न कुछ माता, व्रजै।
ॐ जय शीतला माता...।