महाशिवरात्रि व्रत कथा | शिव पार्वती विवाह और पूजा विधि
🙏 महाशिवरात्रि व्रत कथा 🙏 **महाशिवरात्रि का महत्व:** महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का सर्वाधिक पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है। यह व्रत फाल...
पढ़ें →यह शरद पूर्णिमा के दिन बिंदायक व्रत की कथा है। आश्विन मास की पूर्णिमा को होता है। इस दिन चंद्रमा की किरणें अमृत समान होती हैं। खीर बनाकर चांदनी में रखी जाती है। गणेश और चंद्रमा की पूजा होती है। रात्रि जागरण का विधान है। कथा सुनने से स्वास्थ्य और मानसिक शांति मिलती है।
एक मेंढक और एक मेंढकी थे। मेंढकी रोज गणेशजी का नाम लेती थी। एक दिन मेंढक ने कहा, "तू पराये पुरुष का नाम क्यों लेती है? अगर तू नाम लेगी तो मैं तुझे मार डालूँगा।"
तब राजा की दासी आई और दोनों को पतीले में डालकर अंगीठी पर चढ़ा दिया। जब दोनों जलने लगे तो मेंढक बोला, "मेंढकी, बहुत कष्ट हो रहा है। तू गणेशजी को याद कर, नहीं तो हम दोनों मर जायेंगे।"
तब मेंढकी ने सात बार कहा, "विनायक जी — विनायक जी।" तभी वहाँ दो सांड लड़ते हुए आए और पतीला गिरा दिया; पानी बहकर तालाब में चला गया। मेंढक और मेंढकी तालाब में तैरते हुए चले गए और बच गए।
हे विनायक जी! जैसे आपने मेंढक-मेंढकी का कष्ट दूर किया, वैसे ही सभी भक्तों का भी कष्ट दूर करिए। बोलो — विनायक जी महाराज की जय!