महाशिवरात्रि व्रत कथा | शिव पार्वती विवाह और पूजा विधि
🙏 महाशिवरात्रि व्रत कथा 🙏 **महाशिवरात्रि का महत्व:** महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का सर्वाधिक पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है। यह व्रत फाल...
पढ़ें →यह बिंदायक जी की तीसरी पारंपरिक व्रत कथा है। यह कथा धन-समृद्धि से संबंधित है। गरीबी से मुक्ति के लिए यह व्रत किया जाता है। गणेश जी की कृपा से धन प्राप्ति होती है। व्रत में श्रद्धा और विश्वास जरूरी है। 21 बार यह व्रत करने का विधान है। कथा सुनने से गणेश की कृपा और आर्थिक समृद्धि मिलती है।
एक मेंढक और मेंढकी थे। मेंढकी रोज़ गणेश जी की कहानी कहती थी। एक दिन मेंढक बोला कि तू पराये पुरुष का नाम क्यों लेती है ?अगर तू लेगी तो मैं तुझे मारूंगा।
राजा की दासी आयी तो पतीले में डालकर अंगीठी पर चढ़ा दिया। जब दोनों सिकने लगे तो मेंढक बोला ,”मेंढकी बहुत कष्ट हो रहा है। तू गणेशजी को याद कर ,नहीं तो हम दोनों मर जायेंगे। “तब मेंढकी ने सात बार “विन्दायक जी -विन्दायक जी ” कहा ।
तभी दो सांड वहाँ लड़ते हुए आये और पानी के पतीले को गिरा दिया। मेंढक और मेंढकी तालाब में चले गए।
हे बिन्दायक जी !जैसे मेंढक – मेंढकी का कष्ट दूर किया ,वैसे सबका करना।
बोलो बिन्दायक जी महाराज की जय !!!