माघ मास - पवित्र स्नान और दान का समय

माघ मास हिंदू पंचांग का सबसे पवित्र और पुण्यदायी महीना माना जाता है जो जनवरी-फरवरी में आता है। इस मास में स्नान-दान का विशेष महत्व है और ऐसा माना जाता है कि माघ मास में किया गया दान करोड़ गुना फल देता है। माघ स्नान की परंपरा सदियों पुरानी है जिसमें लोग प्रतिदिन प्रातःकाल पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। प्रयागराज में गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम पर माघ मेला लगता है जहां लाखों श्रद्धालु स्नान के लिए आते हैं। माघ की पूर्णिमा का विशेष महत्व है और इस दिन तीर्थस्थलों में विशाल मेले लगते हैं। बसंत पंचमी भी इसी माह में आती है जब सरस्वती माता की पूजा की जाती है और शिक्षा का शुभारंभ किया जाता है। माघ मास में तिल और गुड़ का विशेष महत्व है। इस महीने में व्रत, उपवास और जप-तप का विशेष फल मिलता है। शीत ऋतु होने के कारण गरम वस्त्रों का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। यहां आपको माघ मास के सभी व्रत-पर्व, स्नान की विधि, दान का महत्व और परंपराएं विस्तार से मिलेंगी। बसंत पंचमी की पूजा विधि और माघ स्नान के नियम भी बताए गए हैं।

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