श्री लक्ष्मीनारायण स्तोत्र / नमो नारायण (short stotras) | Lakshmi‑Narayana — मंत्र व पाठ
ॐ नमो नारायणाय ॥ Transliteration: Om Namo Nārāyaṇāya Meaning (भावार्थ): ॐ — आद्यध्वनि/आत्मिक अभिवादन। नमो — नमन/प्रणाम। नारायणाय — परमपालक नारायण (भग...
पढ़ें →दुर्गा सप्तशती मार्कंडेय पुराण का सबसे शक्तिशाली अध्याय है। इसमें 700 श्लोक हैं और तेरह अध्याय हैं। चंडी पाठ के नाम से भी जाना जाता है। माता दुर्गा की महिमा और शक्ति का वर्णन है। नवरात्रि में विशेष पाठ होता है। दुर्गा सप्तशती पाठ अत्यंत फलदायी है। सप्ताह में एक बार पाठ करना शुभ है। पाठ से माता दुर्गा की कृपा और सभी शक्तियां मिलती हैं।
चामुंडा बीज (Chamunda / Chandika Navarna)
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥
उपयोग: भय, बाधा निवारण और शक्ति‑संकल्प के लिए।
दुं बीज (Durga bija)
ॐ दुं दुर्गायै नमः ॥
उपयोग: सामान्य तौर पर देवी दुर्गा की आराधना और संकट विनाश के लिए।
दुर्गा गायत्री (Durga Gayatri)
ॐ देवी महामाये विद्महे महाशक्त्यै धीमही तन्नो दुर्गा प्रचोदयात् ॥
उपयोग: ध्यान/ज्ञानवर्धन और देवी की प्रेरणा हेतु।
या देवी सर्वभूतेषु (Devi‑stuti — Devi Mahatmya की आरंभिक स्तुति)
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥
उपयोग: पाठ/आद्यक्षया के आरम्भ में स्तुति व समर्पण हेतु।
सर्वमंगलमंगल्ये (Durga‑stuti)
सर्वमंगलमंगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते ॥
उपयोग: देवी की स्तुति और मंगलफल प्राप्ति हेतु।
ऐगिरीनन्दिनी (Aigiri Nandini — चंडी स्तुति का प्रसिद्ध अंश)
ऐगिरी नन्दिनी नन्दित मेदिनी उच्चल नीलोद्याम् ।
चण्डिका हुम् चण्डमुण्डमथन नभमण्डल आदि ॥
उपयोग: चंडी‑स्तुति में शक्तिशाली स्तवन के रूप में पाठ के समय पढ़ा जाता है।
चंडी नवरत्न / चंडी नवरात्र मंत्र (संक्षेप)
ॐ श्रीं नमो भगवत्यै चण्डिकायै च चण्डिके नमः ॥
उपयोग: चंडी/चामुण्डा की आराधना में सामान्य समर्पण मंत्र।
देवी महात्म्य आरम्भ‑मंत्र (पाठ आरम्भ में अक्सर लिया जाता है)
ॐ नमो भगवत्यै चण्डिकायै स्वाहा ॥
उपयोग: पाठ/हवन के आरम्भ में समर्पण और आह्वान हेतु।
शक्तिस्वरूप बीज (ह्रीं)
ॐ ह्रीं नमः ॥
उपयोग: दिव्य उर्जा और आंतरिक शक्ति जागरण के लिये (अनेक मंत्रों के साथ बीज रूप में जपा जाता है)।
संक्षिप्त सुरक्षा‑मंत्र (Devi Protection)
ॐ श्रीं क्लीं देवी नमोऽस्तुते ॥
उपयोग: सार्वत्रिक रक्षा‑संकल्प एवं आशीर्वाद के लिये।