देवी मंत्र - मातृ शक्ति के दिव्य मंत्र

देवी मंत्र मातृ शक्ति को समर्पित अत्यंत शक्तिशाली और पवित्र मंत्र हैं जो भारतीय वैदिक परंपरा में अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। देवी को आदि शक्ति माना जाता है और उनके मंत्रों में अपार शक्ति और ऊर्जा निहित है। दुर्गा मंत्र, काली मंत्र, लक्ष्मी मंत्र, सरस्वती मंत्र और महाकाली मंत्र प्रमुख देवी मंत्र हैं। प्रत्येक देवी के विशेष बीज मंत्र होते हैं जैसे दुर्गा का "ॐ दुं दुर्गायै नमः", लक्ष्मी का "ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद", सरस्वती का "ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः"। देवी मंत्र जप से शक्ति प्राप्ति, सुरक्षा, समृद्धि और ज्ञान की वृद्धि होती है। नवरात्रि में देवी मंत्र जप का विशेष महत्व है। देवी मंत्रों का जप करते समय पूर्ण श्रद्धा और शुद्ध मन का होना आवश्यक है। महिलाओं के लिए देवी मंत्र जप विशेष फलदायी होता है। देवी मंत्र संकट निवारण, शत्रु बाधा दूर करने और परिवार की रक्षा के लिए अत्यंत प्रभावी हैं। यहां आपको सभी प्रमुख देवी मंत्रों का संग्रह मिलेगा जिसमें मंत्र का संस्कृत पाठ, हिंदी अनुवाद, उच्चारण विधि, जप संख्या और लाभ विस्तार से बताए गए हैं।

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श्री लक्ष्मी अष्टक (Namastestu Mahā Māye) | Lakshmi Ashtakam — मंत्र, अर्थ व उपयोग

नमस्तेस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते । शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।। 1 ।। नमस्ते गरुडध्वजायै सुरासुरप्रियाय च । न...

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लक्ष्मी गायत्री (Lakshmi Gayatri)

ॐ महालक्ष्म्यै विद्महे महाप्रभवायै धीमहि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् ॥ Transliteration: Om Mahālakshmyai Vidmahe Mahāprabhavāyai Dhīmahi Tanno Lakshmī Prachodayāt उपयोग: ध्यान, बुद्धि‑...

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महालक्ष्मी बीज (Mahalakshmi Bīja)

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः ॥ Transliteration: Om Shreem Hreem Kleem Mahālakshmyai Namah उपयोग / जप: समृद्धि व वैभव के लिए सबसे सामान्य बीज‑मंत्र। 108 या 1080 माला‑...

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