मानसा माता आरती | Mansa Mata / Mansa Devi Aarti
॥ आरती — मानसा माता ॥ जय मानसा माता, करुणा की मूरत प्यारी। साँप-रक्षक, संकट हरने वाली, हो जीवन में उजियारी। ॥जय माता॥ तेरी असीम दया स...
पढ़ें →कूष्माण्डा माता नवदुर्गा की चौथी देवी हैं। नवरात्रि के चौथे दिन उनकी पूजा होती है। कूष्माण्डा सृष्टि की रचयिता हैं। उनकी आरती ऊर्जा और प्रकाश का प्रतीक है। सूर्य जैसा तेज धारण करने वाली देवी हैं। आरती से स्वास्थ्य और ऊर्जा मिलती है। माता की कृपा से सभी रोग दूर होते हैं।
॥ आरती — देवी कूष्मण्डा जी की (दोहा‑शैली) ॥
कूष्मण्डा जय जग सुखदानी, मुझ पर दया करो महारानी।
पिङ्गला ज्वालामुखी निराली, शाकम्बरी माँ भोली भाली॥
ॐ जय कूष्मण्डा माता॥
लाखों नाम निराले तेरे, भक्त कई मतवाले तेरे।
भीमा पर्वत पर है डेरा, स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
ॐ जय कूष्मण्डा माता॥
सबकी सुनती हो जगदम्बे, सुख पहुँचती हो माँ अम्बे।
तेरे दर्शन का मैं प्यासा, पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
ॐ जय कूष्मण्डा माता॥
माँ के मन में ममता भारी, क्यों ना सुनेगी अरज हमारी।
तेरे दर पर किया है डेरा, दूर करो माँ संकट मेरा॥
ॐ जय कूष्मण्डा माता॥
मेरे कारज पूरे कर दो, मेरे तुम भंडारे भर दो।
तेरा दास तुझे ही ध्याए, भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥
ॐ जय कूष्मण्डा माता॥