श्री सूर्यदेव आरती (Shree Suryadev Aarti)
॥ आरती — श्री सूर्यदेव की ॥ जय कश्यप‑नन्दन, ॐ जय अदिति‑नन्दन। त्रिभुवन‑तिमिर‑निकन्दन, भक्त‑हृदय‑चन्दन॥ जय कश्यप‑नन्दन, ॐ जय अदित...
पढ़ें →हिंदू धर्म में विभिन्न देवताओं की आरती का अपना विशेष महत्व है। प्रत्येक देवता की आरती उनके विशेष गुणों, शक्तियों और लीलाओं का वर्णन करती है। भगवान राम धर्म और मर्यादा के प्रतीक हैं, श्री कृष्ण प्रेम और भक्ति के, भगवान शिव संहार और कल्याण के, गणेश जी विघ्नहर्ता के और हनुमान जी शक्ति और सेवा के प्रतीक माने जाते हैं। प्रत्येक देवता की आरती में उनकी महिमा और कृपा की प्रार्थना की जाती है। सुबह की आरती से दिन की शुभ शुरुआत होती है और शाम की आरती से मन को शांति मिलती है। मंगलवार को हनुमान जी की आरती, सोमवार को शिव जी की आरती, बुधवार को गणेश जी की आरती का विशेष महत्व है। आरती करते समय पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव से मन को एकाग्र करना चाहिए। यहां आपको सभी प्रमुख देवताओं की संपूर्ण आरती संग्रह मिलेगा - चाहे वह राम भगवान की "ॐ जय जगदीश हरे" हो, कृष्ण की "आरती कुंजबिहारी की" हो, शिव की "जय शिव ओंकारा" हो या गणेश की "सुखकर्ता दुखहर्ता" हो। प्रत्येक आरती के साथ विस्तृत अर्थ, पूजा विधि और उसके लाभ भी दिए गए हैं।
॥ आरती — श्री सूर्यदेव की ॥ जय कश्यप‑नन्दन, ॐ जय अदिति‑नन्दन। त्रिभुवन‑तिमिर‑निकन्दन, भक्त‑हृदय‑चन्दन॥ जय कश्यप‑नन्दन, ॐ जय अदित...
पढ़ें →॥ आरती — श्री शनिदेव की ॥ जय जय श्री शनिदेव, भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु, छाया महतारी॥ जय जय श्री शनिदेव, भक्तन हितकारी॥ श्या...
पढ़ें →॥ आरती — श्री गोवर्धन महाराज की ॥ श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज — तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ। तोपे पान चढ़े, तोपे फूल चढ़े — तोपे च...
पढ़ें →॥ श्री विश्वकर्मा आरती ॥ प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवो, प्रभु विश्वकर्मा। सुदामा की विनय सुनी और कंचन महल बनाये। सकल पदारथ देकर प्रभ...
पढ़ें →॥ श्री रामदेव आरती ॥ ॐ जय श्री रामादे स्वामी, जय श्री रामादे। पिता तुम्हारे अजमल, मैया मेना दे॥ ॐ जय श्री रामादे। स्वामी जय श्री रामाद...
पढ़ें →॥ आरती — श्री साईं बाबा जी की (दोहा‑शैली) ॥ आरती श्री साईं गुरुवर की, परमानन्द सदा सुरवर की। जा की कृपा विपुल सुखकारी, दुःख शोक, संकट, भ...
पढ़ें →॥ गोरख आरती — दोहा‑शैली (Shree Gorakhnath Aarti) ॥ जय गोरख देवा, जय गोरख देवा। कर कृपा मम ऊपर, नित्य करूँ सेवा॥ जय गोरख देवा॥ शीश जटा अति‑सुन्दर, भा...
पढ़ें →॥ आरती — श्री जाहरवीर जी की ॥ जय जय जाहरवीर हरे, जय जय गूगा वीर हरे। धरती पर आ करके, भक्तों के दुख दूर करे॥ जय जय जाहरवीर हरे॥ जो कोई भ...
पढ़ें →॥ कला जी राठौड़ आरती — श्री कल्लाजी राठौड़ ॥ जय राठौड़ कला, स्वामी जय राठौड़ कला। विघ्न हरण कल्याणी, गौरी शंभू लला ।।जय।। क्षत्रिय पदम ...
पढ़ें →॥ आरती — श्री शिवशंकर जी की ॥ हर हर हर महादेव! सत्य, सनातन, सुन्दर, शिव सबके स्वामी। अविकारी अविनाशी, अज अन्तर्यामी॥ हर हर हर महादेव! ...
पढ़ें →॥ श्री पुरुषोत्तम देव की आरती ॥ जय पुरुषोत्तम देवा, स्वामी जय पुरुषोत्तम देवा। महिमा अमित तुम्हारी, सुर‑मुनि करें सेवा॥ जय पुरुषोत...
पढ़ें →॥ श्री गिरिराज आरती ॥ ॐ जय जय जय गिरिराज, स्वामी जय जय जय गिरिराज। संकट में तुम राखौ, निज भक्तन की लाज॥ ॐ जय जय जय गिरिराज...॥ इन्द्रादि...
पढ़ें →॥ श्री भैरव आरती ॥ सुनो जी भैरव लाड़िले, कर जोड़ कर विनती करूँ। कृपा तुम्हारी चाहिए, मैं ध्यान तुम्हारा ही धरूँ। मैं चरण छुता आपके, अर...
पढ़ें →॥ आरती — लक्ष्मण बालजती की ॥ आरती लक्ष्मण बालजती की। असुर संहारन प्राणपति की॥ जगमग ज्योति अवधपुर राजे। शेषाचल पै आप विराजे॥ आरती ...
पढ़ें →॥ श्री चित्रगुप्त आरती ॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे। स्वामी जय चित्रगुप्त हरे। भक्तजनों के इच्छित फल को पूर्ण करे॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे… ...
पढ़ें →॥ श्री केदारनाथ आरती ॥ जय केदार उदार शंकर, मन भयंकर दुःख हरम। गौरी गणपति स्कन्द नन्दी, श्री केदार नमाम्यहम॥ शैल सुन्दर अति हिमालय, श...
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