देवता आरती संग्रह - भगवान की भक्ति और आराधना

हिंदू धर्म में विभिन्न देवताओं की आरती का अपना विशेष महत्व है। प्रत्येक देवता की आरती उनके विशेष गुणों, शक्तियों और लीलाओं का वर्णन करती है। भगवान राम धर्म और मर्यादा के प्रतीक हैं, श्री कृष्ण प्रेम और भक्ति के, भगवान शिव संहार और कल्याण के, गणेश जी विघ्नहर्ता के और हनुमान जी शक्ति और सेवा के प्रतीक माने जाते हैं। प्रत्येक देवता की आरती में उनकी महिमा और कृपा की प्रार्थना की जाती है। सुबह की आरती से दिन की शुभ शुरुआत होती है और शाम की आरती से मन को शांति मिलती है। मंगलवार को हनुमान जी की आरती, सोमवार को शिव जी की आरती, बुधवार को गणेश जी की आरती का विशेष महत्व है। आरती करते समय पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव से मन को एकाग्र करना चाहिए। यहां आपको सभी प्रमुख देवताओं की संपूर्ण आरती संग्रह मिलेगा - चाहे वह राम भगवान की "ॐ जय जगदीश हरे" हो, कृष्ण की "आरती कुंजबिहारी की" हो, शिव की "जय शिव ओंकारा" हो या गणेश की "सुखकर्ता दुखहर्ता" हो। प्रत्येक आरती के साथ विस्तृत अर्थ, पूजा विधि और उसके लाभ भी दिए गए हैं।

कुल 34 पोस्ट

शिवजी की आरती (Shivji Ki Aarti)

॥ आरती — शिवजी की ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव — अर्धांगिनी धाराः॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ एकानन, चतुर...

पढ़ें →

श्री बालाजी आरती (Shri Balaji Ki Aarti)

॥ आरती — श्री बालाजी / हनुमानजी की ॥ ॐ जय हनुमत वीरा, स्वामी जय हनुमत वीरा। संकट मोचन स्वामी, तुम हो रणधीर॥ ॐ जय हनुमत वीरा॥ पवनपुत्र ...

पढ़ें →

श्री गणेश आरती (Shree Ganesh Aarti)

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥ एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी । माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥ जय गणे...

पढ़ें →