मानसा माता आरती | Mansa Mata / Mansa Devi Aarti
॥ आरती — मानसा माता ॥ जय मानसा माता, करुणा की मूरत प्यारी। साँप-रक्षक, संकट हरने वाली, हो जीवन में उजियारी। ॥जय माता॥ तेरी असीम दया स...
पढ़ें →गिरिराज गोवर्धन पर्वत को कहा जाता है। कृष्ण ने इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए इसे उठाया था। गोवर्धन पूजा दीपावली के अगले दिन होती है। गिरिराज आरती अत्यंत महत्वपूर्ण है। भक्त गोवर्धन की परिक्रमा करते हैं। आरती से कृष्ण की कृपा और समृद्धि मिलती है। यह ब्रज की प्रमुख परंपरा है।
॥ श्री गिरिराज आरती ॥
ॐ जय जय जय गिरिराज, स्वामी जय जय जय गिरिराज।
संकट में तुम राखौ, निज भक्तन की लाज॥
ॐ जय जय जय गिरिराज...॥
इन्द्रादिक सब सुर मिलतुम्हरौं ध्यान धरैं।
ऋषि मुनिजन यश गावें, ते भवसिन्धु तरैं॥
ॐ जय जय जय गिरिराज...॥
सुन्दर रूप तुम्हारौ, श्याम सिला सोहें।
वन उपवन लखि‑लखि के, भक्तन मन मोहें॥
ॐ जय जय जय गिरिराज...॥
मध्य मानसी गङ्गा, कलि के मल हरनी।
तापै दीप जलावें, उतरें वैतरनी॥
ॐ जय जय जय गिरिराज...॥
नवल अप्सरा कुण्डसुहावन‑पावन सुखकारी।
बायें राधा‑कुण्ड नहावें, महा पापहारी॥
ॐ जय जय जय गिरिराज...॥
तुम्ही मुक्ति के दाता, कलियुग के स्वामी।
दीनन के हो रक्षक, प्रभु अन्तर्यामी॥
ॐ जय जय जय गिरिराज...॥
हम हैं शरण तुम्हारी, गिरिवर गिरधारी।
देवकी नंदन कृपा करो, हे भक्तन हितकारी॥
ॐ जय जय जय गिरिराज...॥
जो नर दे परिकर्म, पूजा पाठ करें।
गावें नित्य आरती, पुनि नहिं जनम धरें॥
ॐ जय जय जय गिरिराज...॥