देवी चालीसा संग्रह - मातृ शक्ति की स्तुति

देवी चालीसा मातृ शक्ति को समर्पित चालीस छंदों की दिव्य रचनाएं हैं जिनमें देवी माता के विभिन्न रूपों की स्तुति और महिमा का वर्णन किया गया है। भारतीय संस्कृति में देवी को सर्वोच्च शक्ति माना गया है और उनकी चालीसाओं का पाठ विशेष फलदायी होता है। दुर्गा चालीसा, काली चालीसा, लक्ष्मी चालीसा, सरस्वती चालीसा, पार्वती चालीसा और नवदुर्गा चालीसा प्रमुख देवी चालीसाएं हैं। प्रत्येक देवी की चालीसा उनकी विशेष शक्ति और गुणों का वर्णन करती है। दुर्गा चालीसा शक्ति और रक्षा के लिए, लक्ष्मी चालीसा धन-समृद्धि के लिए, सरस्वती चालीसा ज्ञान-विद्या के लिए और काली चालीसा संकट निवारण के लिए पढ़ी जाती है। देवी चालीसा का पाठ विशेष रूप से नवरात्रि में और शुक्रवार के दिन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। देवी चालीसा पढ़ने से घर में सुख-शांति आती है, परिवार की रक्षा होती है और सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं। महिलाओं के लिए देवी चालीसा का पाठ विशेष लाभदायक है। यहां आपको सभी प्रमुख देवी चालीसाओं का संग्रह मिलेगा जिसमें हर चालीसा का पाठ, अर्थ और पाठ विधि विस्तार से दी गई है।

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श्री गंगा चालीसा (Shri Ganga Chalisa)

॥ दोहा ॥ जय जय जय जग पावनी, जयति देवसरी गंग। जय शिव जटा निवासिनी, अनुपम तुंग तरंग॥ ॥ चौपाई / चालीसा ॥ जय जय जननी हराना अघखानी — आनंद कर...

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श्री काली चालीसा (Shree Kali Chalisa)

॥ दोहा ॥ जय काली जगदम्ब जय, हरनि ओघ अघ पुंज। वास करहु निज दास के, निशदिन हृदय निकुंज॥ जयति कपाली कालिका, कंकाली सुख दानि। कृपा करहु वर...

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श्री राधा चालीसा (Shri Radha Chalisa)

॥ दोहा ॥ श्री राधे वृषभानुजा, भक्तनि प्राणाधार। वृन्दावनविपिन विहारिणी, प्रणवों बारंबार॥ जैसो तैसो रावरौ, कृष्ण प्रिया सुखधाम। च...

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