महामृत्युंजय मंत्र (Mahamrityunjay Mantra)
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॥ महा मृत्युंजय मंत्र का अक्षरशः अ...
पढ़ें →मंत्र वैदिक परंपरा की सबसे महत्वपूर्ण और शक्तिशाली विधा है। मंत्र संस्कृत के पवित्र शब्द और ध्वनि संयोजन हैं जिनमें दिव्य शक्ति निहित है। प्राचीन ऋषि-मुनियों ने गहन ध्यान और तपस्या के माध्यम से इन मंत्रों को प्राप्त किया था। वेदों में हजारों मंत्र हैं जो विभिन्न देवी-देवताओं और प्राकृतिक शक्तियों को समर्पित हैं। मंत्र जप से मन की एकाग्रता बढ़ती है, नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। गायत्री मंत्र सबसे पवित्र और शक्तिशाली मंत्र माना जाता है। महामृत्युंजय मंत्र रोग निवारण और दीर्घायु के लिए जपा जाता है। ओम मंत्र सृष्टि का मूल मंत्र है। हर देवी-देवता के विशेष बीज मंत्र होते हैं जैसे गणेश का "ॐ गं गणपतये नमः", शिव का "ॐ नमः शिवाय", विष्णु का "ॐ नमो नारायणाय" आदि। मंत्र जप का सही उच्चारण और विधि बहुत महत्वपूर्ण है। प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में मंत्र जप विशेष फलदायी होता है। यहां आपको विभिन्न देवी-देवताओं के मंत्र, बीज मंत्र, स्तोत्र और जप विधि का विस्तृत संग्रह मिलेगा। प्रत्येक मंत्र का अर्थ, उच्चारण और लाभ भी बताया गया है।
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॥ महा मृत्युंजय मंत्र का अक्षरशः अ...
पढ़ें →श्री शुभ ॥ श्री लाभ ॥ श्री गणेशाय नमः॥ नमस्तेस्तू महामाये श्रीपिठे सूरपुजिते । शंख चक्र गदा हस्ते महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥१॥ नमस्ते...
पढ़ें →मंत्र: माँ गायत्री (Maa Gayatri) ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ इस मंत्र का हिंदी में मतल...
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