नवग्रह चालीसा | Navgrah Chalisa
॥ दोहा ॥ श्री गणपति गुरुपद कमल, प्रेम सहित सिरनाय। नवग्रह चालीसा कहत, शारद होत सहाय जय। जय रवि शशि सोम बुध, जय गुरु भृगु शनि राज। जयति र...
पढ़ें →देवता चालीसा हिंदू धर्म के प्रमुख भगवानों को समर्पित चालीस पदों की भक्तिमय रचनाएं हैं। इन चालीसाओं में भगवान के अवतार, लीलाएं, गुण और महिमा का सुंदर वर्णन किया गया है। हनुमान चालीसा सबसे लोकप्रिय और शक्तिशाली मानी जाती है जिसका पाठ संकट निवारण के लिए किया जाता है। राम चालीसा में भगवान राम की मर्यादा और धर्म का वर्णन है। कृष्ण चालीसा में श्री कृष्ण की बाललीला और प्रेम भक्ति का चित्रण है। शिव चालीसा में महादेव की महिमा और शक्ति का वर्णन है। गणेश चालीसा विघ्नहर्ता गणपति की स्तुति है जो नए कार्यों के शुभारंभ में पढ़ी जाती है। प्रत्येक देवता की चालीसा का अपना विशेष समय और फल होता है। हनुमान चालीसा मंगलवार और शनिवार को, शिव चालीसा सोमवार को, गणेश चालीसा बुधवार को और कृष्ण चालीसा एकादशी को पढ़ना विशेष शुभ है। चालीसा पाठ से भक्ति में वृद्धि होती है, मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता आती है। यहां आपको सभी प्रमुख देवताओं की चालीसाओं का संपूर्ण संग्रह मिलेगा। हर चालीसा का हिंदी पाठ, अर्थ और पाठ विधि विस्तार से दी गई है।
॥ दोहा ॥ श्री गणपति गुरुपद कमल, प्रेम सहित सिरनाय। नवग्रह चालीसा कहत, शारद होत सहाय जय। जय रवि शशि सोम बुध, जय गुरु भृगु शनि राज। जयति र...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ गणपति गिरजा पुत्र को, सुमिरूँ बारम्बार। हाथ जोड़ बिनती करूँ, शारद नाम आधार॥ ॥ चौपाई / चालीसा ॥ जय जय गोरख नाथ अविनासी — कृपा ...
पढ़ें →शेषावतार कल्लाजी राठौड़ पच्चीसी ।। जय श्री कल्याण ।। ।। हेला पच्चीसी।। कल्ला कीरत रावली, हेलो कोस हजार ! बांव पकड़ बैठा करो, अरवडिया आ...
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