श्री बजरंग बाण (Shri Bajrang Baan)
॥ दोहा ॥ निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करै सनमान। तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करै हनुमान॥ ॥ चौपाई / बाण (सुसंगत रूप में) ॥ जय हनुमन्त सन...
पढ़ें →देवता चालीसा हिंदू धर्म के प्रमुख भगवानों को समर्पित चालीस पदों की भक्तिमय रचनाएं हैं। इन चालीसाओं में भगवान के अवतार, लीलाएं, गुण और महिमा का सुंदर वर्णन किया गया है। हनुमान चालीसा सबसे लोकप्रिय और शक्तिशाली मानी जाती है जिसका पाठ संकट निवारण के लिए किया जाता है। राम चालीसा में भगवान राम की मर्यादा और धर्म का वर्णन है। कृष्ण चालीसा में श्री कृष्ण की बाललीला और प्रेम भक्ति का चित्रण है। शिव चालीसा में महादेव की महिमा और शक्ति का वर्णन है। गणेश चालीसा विघ्नहर्ता गणपति की स्तुति है जो नए कार्यों के शुभारंभ में पढ़ी जाती है। प्रत्येक देवता की चालीसा का अपना विशेष समय और फल होता है। हनुमान चालीसा मंगलवार और शनिवार को, शिव चालीसा सोमवार को, गणेश चालीसा बुधवार को और कृष्ण चालीसा एकादशी को पढ़ना विशेष शुभ है। चालीसा पाठ से भक्ति में वृद्धि होती है, मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता आती है। यहां आपको सभी प्रमुख देवताओं की चालीसाओं का संपूर्ण संग्रह मिलेगा। हर चालीसा का हिंदी पाठ, अर्थ और पाठ विधि विस्तार से दी गई है।
॥ दोहा ॥ निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करै सनमान। तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करै हनुमान॥ ॥ चौपाई / बाण (सुसंगत रूप में) ॥ जय हनुमन्त सन...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल। विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥ ॥ चौपाई ॥ जय जय जय गणपति गणराजू — मंगल भरण करण शुभः...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार ब...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल। दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥ जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज। करहु क...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥ ॥ चौपाई / चालीसा ॥ जय गिरिजा पति दीन दयाला — सदा करत...
पढ़ें →॥ चौपाई ॥ श्री रघुबीर भक्त हितकारी — सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी। निशि‑दिन ध्यान धरै जो कोई — ता सम् भक्त और नहीं होई। ध्यान धरें ...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम। अरुण अधर जनु बिम्बा फल, पिताम्बर शुभ साज॥ जय मनमोहन मदन छवि, कृष्णचन्द्र महाराज। करहु क...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ विष्णु सुनिए विनय, सेवक की चितलाय। कीरत कुछ वर्णन करूँ, दीजै ज्ञान बताय॥ ॥ चौपाई / चालीसा ॥ नमो विष्णु भगवान खरारी — कष्ट नश...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ कनक बदन कुण्डल मकर, मुक्ता माला अंग। पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के संग॥ ॥ चौपाई / चालीसा ॥ जय सविता जय जयति दिवाकर — सहस्...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ जय ब्रह्मा, जय स्वयम्भू — चतुरानन सुखमूल। करहु कृपा निज दास पै — रहहु सदा अनुकूल॥ तुम सृजक ब्रह्माण्ड के — अज विधि घाता...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ श्री गुरु चरण सरोज छवि, निज मन मन्दिर धारि। सुमरि गजानन शारदा, ग्रहि आशिष त्रिपुरारि॥ बुद्धिहीन जन जानिये, अवगुणों का भण्डा...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ श्री गुरु पद नमन करि, गिरा गणेश मनाय। कथूं रामदेव विमल यश, सुने पाप विनशाय॥ द्वार केश से आय कर, लिया मनुज अवतार। अजमल गेह बधाव...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ श्री गुरु चरण ध्यान धर, सुमिरि सच्चिदानन्द। श्याम चालीसा भणत हूँ, रच चैपाई छन्द॥ ॥ चौपाई / चालीसा ॥ श्याम श्याम भजि बारम्बार...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ हे पितरेश्वर आपको, दे दियो आशीर्वाद। चरणाशीश नवा दियो, रखदो सिर पर हाथ॥ सबसे पहले गणपत, पाछे घर का देव मनावा जी। हे पितरेश्वर...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ सुवन केहरी जेवर, सुत महाबली रणधीर। बन्दौं सुत रानी बाछला, विपत निवारण वीर॥ जय जय जय चौहान, वन्स गूगा वीर अनूप। अनंगपाल को जीत...
पढ़ें →श्री कल्ला राठोड जय, जय जय कृपा निधान ! जयति जयति जन वरद, परभू करहु जगत कल्याण !! जयति जयति जय जय रणधीर ! कारज सुखद वीर गंभीरा ! जय कल्ला जय ...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ श्री राधापद कमल रज, सिर धरि यमुना कूल। वरणो चालीसा सरस, सकल सुमंगल मूल॥ ॥ चौपाई ॥ जय जय पूरण ब्रह्म बिहारी — दुष्ट दलन लीला अ...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ श्री राधापद कमल रज, सिर धरि यमुना कूल। वरणो चालीसा सरस, सकल सुमंगल मूल॥ ॥ चौपाई ॥ जय जय पूरण ब्रह्म बिहारी, दुष्ट दलन लीला अवत...
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