श्री शिव चालीसा (Shree Shiv Chalisa)
॥ दोहा ॥ जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥ ॥ चौपाई / चालीसा ॥ जय गिरिजा पति दीन दयाला — सदा करत...
पढ़ें →चालीसा हिंदू धर्म में भक्ति साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा है जिसमें चालीस छंदों या दोहों में किसी देवी-देवता की स्तुति की जाती है। सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय चालीसा हनुमान चालीसा है जिसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी। हनुमान चालीसा का पाठ करोड़ों भक्त प्रतिदिन करते हैं। चालीसा पाठ करने से मन में शांति आती है, भय दूर होता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। प्रत्येक चालीसा किसी विशेष देवता को समर्पित होती है और उसमें उस देवता के गुण, शक्ति, लीला और महिमा का वर्णन होता है। हनुमान चालीसा के अलावा गणेश चालीसा, शिव चालीसा, राम चालीसा, कृष्ण चालीसा, दुर्गा चालीसा, लक्ष्मी चालीसा और सरस्वती चालीसा भी बहुत लोकप्रिय हैं। चालीसा का पाठ प्रातःकाल या संध्याकाल में करना विशेष फलदायी माना जाता है। नियमित चालीसा पाठ से भक्ति में वृद्धि होती है और भगवान की कृपा प्राप्त होती है। कई चालीसाएं विशेष संकटों के निवारण के लिए भी पढ़ी जाती हैं। यहां आपको सभी प्रमुख चालीसाओं का संग्रह मिलेगा। प्रत्येक चालीसा के साथ उसका अर्थ, पाठ विधि और लाभ भी बताया गया है।
॥ दोहा ॥ जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥ ॥ चौपाई / चालीसा ॥ जय गिरिजा पति दीन दयाला — सदा करत...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करै सनमान। तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करै हनुमान॥ ॥ चौपाई / बाण (सुसंगत रूप में) ॥ जय हनुमन्त सन...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल। विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥ ॥ चौपाई ॥ जय जय जय गणपति गणराजू — मंगल भरण करण शुभः...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ नमो नमो दुर्गे सुख करनी — नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी। निरंकार है ज्योति तुम्हारी — तिहूँ लोक फैली उजियारी। शशि ललाट मुख मह...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार ब...
पढ़ें →॥ दोहा ॥ हीं श्रीं, क्लीं, मेधा, प्रभा, जीवन‑ज्योति प्रचण्ड । शांति, क्रांति, जागृति, प्रगति, रचना‑शक्ति अखण्ड ॥ जगत जननि, मंगल करनि, गा...
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